केवल नियंत्रण से तय नहीं होगा मालिक-कर्मचारी संबंध, सभी परिस्थितियों पर होगा विचार: झारखंड हाईकोर्ट
Amir Ahmad
9 July 2026 7:04 PM IST

झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम के तहत मालिक और कर्मचारी के संबंध का निर्धारण केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि काम पर किसका नियंत्रण था। अदालत ने स्पष्ट किया कि 'नियंत्रण परीक्षण' कई मानकों में से केवल एक है और अंतिम निर्णय सभी तथ्यों, परिस्थितियों तथा अनुबंध की शर्तों को ध्यान में रखकर ही किया जाएगा।
जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की सिंगल बेंच वर्ष 2016 में रांची स्थित झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) स्टेडियम में फ्लडलाइट की मरम्मत के दौरान तीन विद्युत तकनीशियनों की मौत से जुड़े प्रतिकर मामलों पर सुनवाई कर रही थी।
मामले में यह विवाद था कि कर्मचारी प्रतिकर अधिनियम की धारा 12 के तहत मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी झारखंड राज्य क्रिकेट संघ की है या वॉलमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की।
मृतकों के परिजनों का कहना था कि मोहम्मद इफ्तेखार, शहबाज अंसारी और अलीम अंसारी लगभग 60 मीटर ऊंचाई पर फ्लडलाइट की मरम्मत कर रहे थे। इसी दौरान जिस ट्रॉली पर वे काम कर रहे थे, वह गिर गई और तीनों की मौत हो गई। घटना के बाद दर्ज FIR और आरोपपत्र में वॉलमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड तथा ठेकेदार गुलाब खान को आरोपी बनाया गया।
झारखंड राज्य क्रिकेट संघ ने अदालत में दलील दी कि मृतक तकनीशियनों के साथ उसका कोई मालिक-कर्मचारी संबंध नहीं था। उनका कहना था कि इन तकनीशियनों को ठेकेदार गुलाब खान ने वॉलमोंट की ओर से काम पर लगाया था। FIR और आरोपपत्र में भी संघ या उसके अधिकारियों की कोई भूमिका नहीं बताई गई।
वहीं, वॉलमोंट का कहना था कि उसकी जिम्मेदारी केवल निरीक्षण और निगरानी तक सीमित थी, जबकि क्रेन और अन्य उपकरण उपलब्ध कराना झारखंड राज्य क्रिकेट संघ की जिम्मेदारी थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि मालिक-कर्मचारी संबंध तय करने के लिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि काम पर किसका नियंत्रण था। इसके साथ यह भी देखना होगा कि कर्मचारी संबंधित संस्था के कामकाज का अभिन्न हिस्सा था या स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहा था। इसके अलावा नियुक्ति और सेवा समाप्त करने का अधिकार किसके पास था, वेतन कौन देता था, बीमा अंशदान कौन जमा करता था, काम का संगठन और उपकरण कौन उपलब्ध कराता था तथा दोनों पक्षों के बीच अनुबंध की शर्तें और पारस्परिक दायित्व क्या थे।
अदालत ने कहा,
"मालिक और कर्मचारी के संबंध का निर्धारण करते समय 'नियंत्रण' महत्वपूर्ण कसौटी अवश्य है, लेकिन इसे एकमात्र कसौटी नहीं माना जा सकता। सभी प्रासंगिक तथ्यों और परिस्थितियों का व्यावहारिक तरीके से समग्र मूल्यांकन आवश्यक है।"
खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ठेकेदार के माध्यम से नियुक्ति वास्तविक थी या केवल जिम्मेदारी से बचने का माध्यम, यह प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर तय किया जाएगा।
मामले के तथ्यों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि झारखंड राज्य क्रिकेट संघ का मुख्य कार्य क्रिकेट का संचालन और प्रबंधन करना है, जबकि विद्युत उपकरणों की आपूर्ति, मरम्मत और रखरखाव उसका व्यवसाय नहीं है। दूसरी ओर, वॉलमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सीधे तौर पर इसी कार्य से जुड़ी कंपनी है और साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि मृतक तकनीशियन उसी के लिए ठेकेदार गुलाब खान के माध्यम से काम कर रहे थे।
इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने कर्मचारी प्रतिकर आयुक्त के आदेश में संशोधन करते हुए वॉलमोंट स्ट्रक्चर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को मुख्य नियोक्ता और गुलाब खान को तत्कालीन नियोक्ता ठहराया।


