5 साल तक सहमति से बने संबंधों को शादी न होने पर रेप नहीं कहा जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

Praveen Mishra

4 Aug 2026 12:40 PM IST

  • 5 साल तक सहमति से बने संबंधों को शादी न होने पर रेप नहीं कहा जा सकता: झारखंड हाईकोर्ट

    झारखंड हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि यदि दो वयस्क लंबे समय तक सहमति से रिश्ते में रहे हों, तो केवल शादी नहीं होने के आधार पर उसे रेप नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने आईपीसी की धारा 376 के तहत ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया।

    अभियोजन के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने शादी का झूठा वादा कर लगभग पांच वर्षों तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

    ट्रायल कोर्ट ने इसे धोखे से प्राप्त सहमति मानते हुए आरोपी को दोषी ठहराया था।

    हाईकोर्ट में आरोपी ने कहा कि दोनों पिछले पांच वर्षों से अपनी इच्छा से रिश्ते में थे और एफआईआर भी शादी से इनकार के बाद दर्ज कराई गई।

    रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि घटना के समय पीड़िता 30 वर्ष की थी। उसके साथ मेले गई दोनों महिलाओं ने भी दोनों के बीच पांच वर्षों से प्रेम संबंध होने की पुष्टि की।

    मेडिकल रिपोर्ट में भी पीड़िता को कई वर्षों से यौन संबंध बनाने की अभ्यस्त (habituated to sexual intercourse) बताया गया।

    अदालत ने यह भी पाया कि पीड़िता के बयान में विरोधाभास थे। शिकायत में उसने पांच वर्षों तक यौन शोषण का आरोप लगाया था, जबकि गवाही के दौरान उसने कथित दुष्कर्म केवल दो बार होने की बात कही।

    Maheshwar Tigga v. State of Jharkhand के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक सहमति से बने शारीरिक संबंध केवल विवाह न होने के कारण दुष्कर्म में नहीं बदले जा सकते।

    चूंकि अभियोजन आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका, इसलिए आरोपी को बरी कर दिया गया।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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