डेपुटेशन अनुभव के आधार पर बराबर पद के दावे को नहीं रोकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

Amir Ahmad

6 Jan 2026 7:09 PM IST

  • डेपुटेशन अनुभव के आधार पर बराबर पद के दावे को नहीं रोकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

    जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि मूल विभाग में मिले अनुभव को उधार लेने वाले संगठन में बराबर पद तय करते समय नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

    जस्टिस जावेद इकबाल वानी की बेंच ने कहा कि यह बात कि डेपुटेशन पर आया व्यक्ति उधार लेने वाले विभाग में बराबर पद नहीं मांग सकता, गलतफहमी वाली, साफ तौर पर गलत, अनुचित, तर्कहीन और भेदभावपूर्ण है।

    याचिकाकर्ता प्रतिवादी नंबर 7 का स्थायी कर्मचारी है। वह असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (डिग्री धारक) के रूप में काम कर रहा था। अक्टूबर, 2016 में उसे CVPPL में डेपुटेशन पर भेजा गया। इसके बाद उसे 21.12.2010 के प्रमोटर्स एग्रीमेंट के अनुसार एक बराबर पद दिया गया।

    याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि डेपुटेशन के समय उसने असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के रूप में चार साल की सेवा पूरी कर ली थी। उसे असिस्टेंट मैनेजर का पद दिया गया, जिसे बाद में 03.01.2019 के एक आदेश के अनुसार डिप्टी मैनेजर के रूप में फिर से नामित किया गया।

    जुलाई, 2020 में डिग्री धारक असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के रूप में आठ साल की सेवा पूरी करने के बाद वह उसी 03.01.2019 के आदेश के अनुसार मैनेजर के पद पर रखे जाने का हकदार हो गया।

    इसी तरह के पद पर तैनात एक अधिकारी, के.के. खन्ना को मैनेजर के रूप में फिर से नामित किया गया, जो भेदभावपूर्ण व्यवहार को दर्शाता है।

    इस आधार पर उसका दावा खारिज करना कि वह डेपुटेशन पर था, मनमाना, भेदभावपूर्ण और प्रमोटर्स एग्रीमेंट के विपरीत था।

    प्रतिवादियों ने याचिकाकर्ता के दावे को मुख्य रूप से इस आधार पर खारिज कर दिया,

    याचिकाकर्ता डेपुटेशन पर था और ग्रेड या पद से संबंधित कोई भी लाभ केवल उसके मूल विभाग में लागू सेवा नियमों के तहत ही मांगा जा सकता है।

    CVPPL में उच्च पद पर नियुक्ति पदोन्नति मानी जाएगी, जो डेपुटेशन पर आए व्यक्ति के लिए अस्वीकार्य है।

    कोर्ट का विश्लेषण

    हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों के तर्क को यह मानते हुए खारिज कर दिया कि न तो प्रमोटर्स एग्रीमेंट और न ही 03.01.2019 के आदेश ने मूल विभाग में प्राप्त अनुभव को CVPPL में बराबर पद तय करने के लिए गिनने से बाहर रखा था।

    अनुभव के आधार पर डेपुटेशन पर आए व्यक्ति को उचित ग्रेड और पद पर रखना पदोन्नति नहीं है, बल्कि अनुभव के अनुरूप उचित नियुक्ति है। यह स्टैंड कि डेपुटेशन पर आया व्यक्ति उधार लेने वाले डिपार्टमेंट में बराबर का पद नहीं मांग सकता, गलत, साफ़ तौर पर गलत, अनुचित, अतार्किक और भेदभावपूर्ण पाया गया।

    याचिकाकर्ता के साथ उसी तरह के पद पर मौजूद दूसरे अधिकारी की तुलना में किया गया अलग व्यवहार कानून में गलत था।

    रिट याचिका को मंज़ूर करते हुए हाईकोर्ट ने 14.08.2023 के विवादित कम्युनिकेशन और 12.10.2020 के ऑफिस मेमोरेंडम रद्द कर दिया।

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