पति की गर्लफ्रेंड IPC की धारा 498A के तहत 'रिश्तेदार' की परिभाषा से बाहर, क्रूरता का मुकदमा नहीं चल सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

Shahadat

17 April 2026 8:04 PM IST

  • पति की गर्लफ्रेंड IPC की धारा 498A के तहत रिश्तेदार की परिभाषा से बाहर, क्रूरता का मुकदमा नहीं चल सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

    जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि पति के साथ शादी के बाहर संबंध रखने वाली महिला रणबीर दंड संहिता (RPC) की धारा 498-A (जो IPC की धारा 498-A के बराबर है) के तहत "रिश्तेदार" नहीं मानी जाएगी। इसलिए उस प्रावधान के तहत उस पर क्रूरता या उत्पीड़न का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

    कोर्ट ने एक महिला के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इस महिला पर पति की प्रेमिका होने का आरोप था और उसे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ इस मामले में आरोपी बनाया गया। इस मामले में शिकायतकर्ता पत्नी ने दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न के अस्पष्ट और सामान्य आरोप लगाए।

    कोर्ट जम्मू-कश्मीर CrPC की धारा 561-A (CrPC की धारा 482) के तहत दायर दो संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। इन याचिकाओं में ऊधमपुर के महिला पुलिस थाने में RPC की धारा 498-A और 506 के तहत दर्ज FIR, चार्जशीट और आरोप तय करने वाले आदेश को रद्द करने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं में पति, उसके माता-पिता, भाई, भाभी, बहन और एक महिला (आरती देवी) शामिल थे, जिस पर पति की प्रेमिका होने का आरोप है।

    जस्टिस शहजाद अजीम की बेंच ने 'U. Suvetha बनाम State by Inspector of Police' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए यह टिप्पणी की:

    "किसी भी तरह से कोई गर्लफ्रेंड या यहां तक ​​कि शाब्दिक अर्थ में कोई रखैल भी 'रिश्तेदार' की श्रेणी में नहीं आती। 'रिश्तेदार' शब्द अपने दायरे में एक विशेष 'दर्जा' (Status) समेटे हुए है। ऐसा दर्जा किसी को दिया जाना अनिवार्य है।"

    शिकायतकर्ता पेशे से पुलिसकर्मी है। उसने वर्ष 2016 में याचिकाकर्ता नंबर 5 (जो सेना में कार्यरत है) से शादी की थी। शादी के सात महीने के भीतर ही उसने शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उसने अपने ससुराल वालों पर क्रूरता, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न, तथा दहेज की मांग करने का आरोप लगाया। साथ ही उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके पति ने आरती देवी के साथ अवैध संबंध बना लिए हैं।

    पुलिस ने FIR दर्ज की और चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने RPC की धारा 498-A और 506 के तहत आरोप तय किए।

    याचिकाकर्ताओं ने यह तर्क दिया कि पति ने पत्नी की FIR से पहले ही—यानी 2016 में—हिंदू विवाह अधिनियम के तहत विवाह रद्द करने के लिए याचिका और पत्नी के खिलाफ RPC की धारा 420/506 के तहत एक आपराधिक शिकायत दायर की।

    उन्होंने यह दलील दी कि वर्तमान कार्यवाही केवल एक जवाबी कार्रवाई (counter-blast) है।

    Case Title: Mela Ram & Ors. Vs State of J&K & Anr. Arti Devi Vs State of J&K & Anr.

    Next Story