“अपराध वासना का नहीं, प्यार का नतीजा था”: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO आरोपी को ज़मानत दी

Shahadat

8 April 2026 10:17 AM IST

  • “अपराध वासना का नहीं, प्यार का नतीजा था”: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO आरोपी को ज़मानत दी

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने POCSO Act के तहत आरोपी को नियमित ज़मानत दी। कोर्ट ने आरोपी और नाबालिग लड़की के बीच स्वीकार किए गए वैवाहिक संबंध और इस तथ्य पर गौर किया कि उनके मिलन से एक बच्चा भी पैदा हुआ है।

    कोर्ट ने आगे टिप्पणी की कि आरोपी को जेल में लगातार रखने से पीड़ित लड़की को मुश्किल होगी, जिसे अन्यथा बच्चे को अकेले ही पालना पड़ेगा, क्योंकि हालात एक आपसी सहमति वाले रिश्ते की ओर इशारा करते हैं।

    जस्टिस संदीप शर्मा ने टिप्पणी की:

    “इस कोर्ट को ट्रायल के दौरान ज़मानत मांगने वाले को अनिश्चित काल तक जेल में रखने का कोई कारण नज़र नहीं आता, क्योंकि ऐसा होने पर, आखिरकार नुकसान पीड़ित लड़की का ही होगा, जिसे अन्यथा अपने नाबालिग बच्चे को अकेले ही पालना पड़ेगा।”

    इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा:

    “यह अपराध वासना का नहीं, बल्कि प्यार का नतीजा था... आपराधिक कार्यवाही जारी रखने और आरोपी को जेल में रखने से इस पारिवारिक इकाई में ही खलल पड़ेगा और पीड़ित लड़की, नवजात बच्चे और खुद समाज के ताने-बाने को भी भारी नुकसान पहुंचेगा।”

    मामले की पृष्ठभूमि:

    यह मामला तब सामने आया जब 15 जनवरी, 2026 को पुलिस को सिविल अस्पताल, चोवारी से एक नाबालिग लड़की के बारे में जानकारी मिली, जिसे बच्चे के जन्म के लिए भर्ती कराया गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने पाया कि लड़की नाबालिग थी और उसके साथ आए लोग उसकी बालिग होने या शादी से जुड़ा कोई भी दस्तावेज़ पेश नहीं कर पाए। इसलिए पुलिस ने FIR दर्ज की और ज़मानत मांगने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जिसने खुद को लड़की का पति बताया था।

    इसके बाद आरोपी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483 के तहत नियमित ज़मानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

    उसने दलील दी कि उसने और लड़की ने शादी कर ली थी और वे साथ रह रहे थे। उसने आगे कहा कि लड़की पहले ही एक बच्चे को जन्म दे चुकी है और पति की गैर-मौजूदगी में उसके लिए नाबालिग बच्चे को पालना मुश्किल होगा।

    कोर्ट ने पाया कि नाबालिग लड़की के बयान के अनुसार, उसने कहा था कि उसने अपनी मर्ज़ी से आरोपी के साथ रिश्ता बनाया और उससे शादी की थी। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी पाया कि FIR लड़की या उसके परिवार वालों ने नहीं, बल्कि अस्पताल के अधिकारियों ने दर्ज करवाई थी। लड़की ने याचिकाकर्ता के साथ अपना वैवाहिक जीवन जारी रखने की इच्छा ज़ाहिर की थी। कोर्ट ने आगे यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता का जेल में बने रहना, पीड़ित लड़की और बच्चे पर बुरा असर डालेगा।

    अतः, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ज़मानत दी।

    Case Name: Suneel Kumar V/s State of Himachal Pradesh & Anr.

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