NDPS मामले में दोषी दो पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी बरकरार, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने वाले बन गए

Praveen Mishra

24 Aug 2026 8:59 PM IST

  • NDPS मामले में दोषी दो पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी बरकरार, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने वाले बन गए

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने NDPS Act के तहत दोषी ठहराए गए दो पुलिस कांस्टेबलों की सेवा से बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि पुलिसकर्मियों की NDPS अपराधों में संलिप्तता गंभीर मामला है और इस मामले में बर्खास्तगी न तो अत्यधिक कठोर है और न ही असंगत।

    जस्टिस अजय मोहन गोयल ने कहा कि दोषी पुलिस विभाग के कर्मचारी हैं और ऐसे में “कानून के रक्षक ही कानून तोड़ने वाले बन गए हैं।”

    मामला कांस्टेबल गौरव वर्मा और लक्ष्य चौहान से जुड़ा है। गौरव वर्मा को 2009 में कांस्टेबल नियुक्त किया गया था। उसे NDPS Act की धारा 20 के तहत दोषी ठहराया गया था। उसके कब्जे से कथित तौर पर 1003 ग्राम चरस बरामद हुई थी। उसे तीन वर्ष की सजा और ₹25,000 जुर्माने की सजा दी गई।

    वहीं, 2015 में स्पोर्ट्स कोटा से कांस्टेबल नियुक्त लक्ष्य चौहान को 2019 में दर्ज FIR के संबंध में NDPS Act की धाराओं 21, 25 और 29 के तहत दोषी ठहराया गया था।

    दोनों ने अपनी बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 311(2)(a) के तहत विभागीय जांच किए बिना बर्खास्तगी की गई और DGP को ऐसी सजा देने का अधिकार नहीं था।

    हाईकोर्ट ने कहा कि पंजाब पुलिस नियमों के नियम 16.1 के तहत उच्च रैंक का अधिकारी कांस्टेबल को बर्खास्त कर सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि होने मात्र से स्वतः बर्खास्तगी जरूरी नहीं होती, बल्कि संबंधित प्राधिकारी को अपराध की प्रकृति और दोषी के आचरण को देखते हुए उचित सजा तय करनी होती है।

    कोर्ट ने पाया कि DGP ने दोनों मामलों में NDPS अपराधों की प्रकृति और गंभीरता तथा दोषसिद्धि पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी का आदेश दिया था।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अपील लंबित रहने के दौरान सजा के निलंबन से अनुच्छेद 311(2)(a) के तहत कार्रवाई पर रोक नहीं लगती, जब तक दोषसिद्धि कायम है।

    कोर्ट ने बर्खास्तगी के आदेशों में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाते हुए दोनों रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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