केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में वकील बीए अलूर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका बंद की

  • केरल हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में वकील बीए अलूर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका बंद की

    केरल हाईकोर्ट ने वकील बी ए अलूर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए बंद कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि प्राथमिकी में कथित अपराध जमानती है।

    एडवोकेट अलूर के खिलाफ आरोप था कि उन्होंने एक महिला मुवक्किल का यौन उत्पीड़न किया और एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 354 ए के तहत अपराध दर्ज किया गया।

    अग्रिम जमानत याचिका को बंद करते हुए, जस्टिस सोफी थॉमस ने कहा:

    "याचिकाकर्ता के खिलाफ कथित अपराध आईपीसी की धारा 354 ए के तहत है और चूंकि यह एक जमानती अपराध है, इसलिए अग्रिम जमानत याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। इसलिए यह एप्लिकेशन बंद किया जाता है।

    शिकायतकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता हसीना टी ने कहा कि उनके खिलाफ लगातार धमकी और उत्पीड़न किया जा रहा था और पुलिस अधिकारी एडवोकेट अलूर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे थे।

    एडवोकेट अलूर के वकील ने प्रस्तुतियों का विरोध किया और तर्क दिया कि वास्तविक शिकायतकर्ता अग्रिम जमानत आवेदन में पक्षकार नहीं था।

    कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि यदि पुलिस अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे थे, तो वास्तविक शिकायतकर्ता संबंधित क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट से संपर्क कर सकता था।

    तदनुसार, कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को बंद कर दिया।

    याचिका अधिवक्ता सीपी उदयभानु, नवनीत.एन.नाथ, रसल जनार्दनन ए., अभिषेक एम. कुन्नाथु, बोबन पलाट, पी.यू.प्रतीश कुमार, पी.आर.अजय, के.यू.स्वप्निल द्वारा दायर की गई है।

    केस टाइटल: बीजू एंटनी अलूर बीए अलूर बनाम केरल राज्य

    केस नंबर: 2024 का बेल एप्पल नंबर 963


    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story