गुजरात की न्यायिक अधिकारी की बहाली का आदेश; पहली जांच रिपोर्ट के बाद डी नोवो जांच रद्द: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
24 April 2026 1:06 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात की एक न्यायिक अधिकारी को बड़ी राहत देते हुए उनके पुनर्बहाली (reinstatement) का आदेश दिया है और कहा है कि विभागीय कार्यवाही में उनके खिलाफ डी नोवो (नई) जांच कराना नियमों के विरुद्ध था।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें न्यायिक अधिकारी के खिलाफ नई जांच को रोकने से इनकार किया गया था, जबकि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अधिकांश आरोपों को खारिज कर दिया गया था।
मामले में अपीलकर्ता, जो गुजरात राज्य न्यायिक सेवा की अधिकारी हैं, के खिलाफ अनुपस्थित रहने और प्रक्रियात्मक अनियमितताओं सहित कई आरोपों के आधार पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई थी।
अमरेली के प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा की गई जांच में 21 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दिसंबर 2023 में प्रस्तुत रिपोर्ट में केवल एक आरोप—लगातार अनुपस्थित रहने—को साबित पाया गया, जबकि सात अन्य आरोप साबित नहीं हुए। इसके बावजूद अनुशासनात्मक प्राधिकारी (हाईकोर्ट की स्थायी समिति) ने मई 2024 में कारण बताओ नोटिस जारी कर जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों को अस्वीकार करने का प्रस्ताव रखा और नई जांच के आदेश दे दिए।
इस निर्णय को चुनौती देते हुए न्यायिक अधिकारी ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
सुप्रीम कोर्ट ने Gujarat Civil Service (General Conditions of Services) Rules, 2002 के नियम 10 का हवाला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ डी नोवो या नई जांच कराना अनुमन्य नहीं है, बल्कि केवल आगे की जांच (further inquiry) ही की जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट इस कानूनी प्रावधान को समझने में विफल रहा।
इन कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए संबंधित न्यायिक अधिकारी को तत्काल प्रभाव से बहाल करने और उन्हें सभी परिणामी लाभ (consequential benefits) देने का निर्देश दिया। अदालत ने अपील को स्वीकार कर लिया।

