वैवाहिक बलात्कार भले अपराध नहीं, लेकिन प्रेम संबंध में जबरन संबंध अपराध—FIR रद्द करने से इनकार: गौहाटी हाईकोर्ट
Praveen Mishra
2 April 2026 11:35 AM IST

गौहाटी हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि प्रेम संबंध (love relationship) होने से बलात्कार के अपराध की गंभीरता कम नहीं हो जाती। अदालत ने कहा कि यदि महिला की इच्छा के विरुद्ध जबरन शारीरिक संबंध बनाया जाता है, तो वह आपराधिक कृत्य ही रहेगा।
जस्टिस प्रांजल दास की पीठ एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) और POCSO अधिनियम की धारा 4 के तहत दर्ज अपराधों से जुड़ा है।
मामले के अनुसार, पीड़िता के पिता ने FIR दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि आरोपी ने घर में घुसकर उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म किया और उसे धमकी दी कि वह इस घटना का खुलासा न करे।
आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि घटना के समय दोनों के बीच प्रेम संबंध था और अब दोनों परिवारों की सहमति से विवाह करने की योजना है। शिकायतकर्ता (पिता) ने भी हलफनामा दाखिल कर कार्यवाही रद्द करने पर आपत्ति नहीं जताई।
हालांकि, राज्य की ओर से इस याचिका का विरोध किया गया और कहा गया कि पीड़िता ने अपने बयानों में स्पष्ट रूप से दुष्कर्म का आरोप लगाया है और मामला गंभीर प्रकृति का है।
अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का अवलोकन करते हुए पाया कि यद्यपि पिता के साथ समझौता हुआ है, लेकिन पीड़िता स्वयं किसी समझौते का हिस्सा नहीं थी और उसके बयान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कोर्ट ने नोट किया कि पीड़िता ने अपने बयान में लगातार दुष्कर्म की बात कही है और कहीं भी सहमति (consent) का संकेत नहीं दिया।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र लगभग 17 वर्ष थी, जिससे मामला और गंभीर हो जाता है।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में केवल समझौते के आधार पर आपराधिक कार्यवाही को रद्द नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी दोहराया कि इस स्तर पर साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं किया जा सकता और यदि प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, तो मामले को ट्रायल के लिए आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज करते हुए आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रेम संबंध सहमति के बराबर नहीं है और महिला की इच्छा के विरुद्ध कोई भी शारीरिक संबंध कानून के तहत अपराध ही माना जाएगा।

