परीक्षा तभी रद्द होगी जब पूरी प्रक्रिया प्रभावित हो, केवल संदिग्ध उम्मीदवारों को अलग किया जाए: गुवाहाटी हाईकोर्ट
Praveen Mishra
17 Jun 2026 10:49 AM IST

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना तभी उचित है जब उसकी निष्पक्षता प्रणालीगत स्तर पर प्रभावित हो और दोषी तथा निर्दोष उम्मीदवारों को अलग करना संभव न हो। यदि संदिग्ध उम्मीदवारों की पहचान की जा सकती है, तो उन्हें अलग कर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
चीफ़ जस्टिस अशुतोष कुमार और जस्टिस अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एन.एफ. रेलवे में चीफ लॉ असिस्टेंट पद की विभागीय पदोन्नति परीक्षा से जुड़े मामले में की। उत्तर कुंजी विवाद के बाद पुनर्मूल्यांकन कराया गया था, लेकिन दो उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हस्तलेखन और अलाइनमेंट संबंधी विसंगतियों के आधार पर रेलवे ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया रद्द कर दी थी।
अदालत ने कहा कि उत्तर कुंजी से जुड़ी सभी कमियां पुनर्मूल्यांकन के जरिए दूर हो चुकी थीं और केवल दो संदिग्ध उम्मीदवारों के कारण पूरी परीक्षा रद्द करना उचित नहीं था। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जहां दोषी उम्मीदवारों को अलग करना संभव हो, वहां पूरी चयन प्रक्रिया रद्द करना ईमानदार उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।
कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को रद्द करते हुए रेलवे को दो संदिग्ध उम्मीदवारों को अलग रखकर चयन प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।

