नागरिकता पर सवाल के बावजूद पासपोर्ट जारी, गौहाटी HC ने जांच के दिए आदेश

Praveen Mishra

15 Sept 2026 1:49 PM IST

  • नागरिकता पर सवाल के बावजूद पासपोर्ट जारी, गौहाटी HC ने जांच के दिए आदेश

    गौहाटी हाईकोर्ट ने असम के गृह विभाग और DGP को जांच करने का निर्देश दिया है कि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल में नागरिकता का मामला लंबित होने के बावजूद एक व्यक्ति को पासपोर्ट कैसे जारी किया गया।

    यह आदेश जस्टिस संजय कुमार मेधी और जस्टिस प्रांजल दास की डिवीजन बेंच ने अहमद हुसैन की याचिका पर दिया।

    2012 में Reference, 2013 में पासपोर्ट

    अहमद हुसैन को 2019 में नगांव फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने 25 मार्च 1971 के बाद का विदेशी नागरिक घोषित किया था। हाईकोर्ट ने गौर किया कि उनके खिलाफ Foreigners Tribunal का Reference 2012 में ही शुरू हो चुका था, जबकि पासपोर्ट 30 मई 2013 को जारी किया गया।

    कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब नागरिकता ही सवालों के घेरे में थी और पासपोर्ट के लिए पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है, तो पुलिस ने अनुकूल रिपोर्ट कैसे दी?

    कोर्ट ने गृह विभाग और DGP को जांच कर जिम्मेदारी तय करने और दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

    नागरिकता साबित करने में विफल रहे याचिकाकर्ता

    याचिकाकर्ता ने विभिन्न वर्षों की वोटर लिस्ट, EPIC, स्कूल प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिकता साबित करने की कोशिश की।

    हालांकि, कोर्ट ने दस्तावेजों में कई विसंगतियां पाईं। अदालत ने कहा कि Foreigners Act की धारा 9 के तहत भारतीय नागरिकता साबित करने का बोझ हमेशा याचिकाकर्ता पर रहता है।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि EPIC नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं है।

    अंततः हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता अपनी नागरिकता साबित करने में विफल रहा और Foreigners Tribunal के 2019 के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। साथ ही पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया की जांच के निर्देश दिए।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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