दिल्ली हाईकोर्ट में PIL: NEET विरोध प्रदर्शन की NIA जांच की मांग, आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग का आरोप
Shahadat
23 July 2026 10:45 AM IST

NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को हुए "संसद चलो" विरोध प्रदर्शन की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) से जांच कराने के निर्देश देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई।
याचिका में दावा किया गया कि यह आंदोलन एक बड़ी साजिश का हिस्सा था, जिसमें विदेशी फंडिंग वाली संस्थाएं और राजनीतिक लोग शामिल थे।
यह याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने दायर की।
याचिकाकर्ता के अनुसार, NEET परीक्षा पेपर लीक को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन, विभिन्न राजनीतिक नेताओं के शामिल होने के बाद कथित तौर पर एक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया।
याचिका में आरोप लगाया गया कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान हिंसा हुई, लोगों की आवाजाही में बाधा डाली गई, पत्रकारों पर हमले हुए, सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की गई और पुलिसकर्मी घायल हुए।
इसमें आगे कहा गया कि इन घटनाओं के कारण आयोजकों, प्रतिभागियों और किसी भी कथित बाहरी या विदेशी प्रभाव की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
PIL में सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने का भी जिक्र है और विदेशी संगठनों के साथ उनके कथित संबंधों के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों का हवाला दिया गया। इसमें कहा गया कि इन पहलुओं की जांच सक्षम अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए।
इसमें आरोप लगाया गया कि अपनी पहली पत्नी से शादी के बाद, वांगचुक को विभिन्न विदेशी संगठनों से काफी समर्थन और पहचान मिलने लगी। इसमें यह भी कहा गया कि उनके जुड़ाव, फंडिंग के संबंध और संस्थागत जुड़ाव उस मामले से जुड़े संगठनों और हितधारकों के व्यापक नेटवर्क की जांच करते समय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
याचिका में कहा गया,
"यह बताना जरूरी है कि तथाकथित विरोध प्रदर्शन असल में छात्रों का या छात्रों से जुड़ी चिंताओं के लिए किया गया वास्तविक विरोध नहीं है। बल्कि, यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा लगता है, जिसे कथित तौर पर देश विरोधी और विदेशी तत्वों ने वित्तीय प्रभाव और धन-संसाधनों का इस्तेमाल करके देश को अस्थिर करने के इरादे से रचा था।"
याचिकाकर्ता का आरोप है कि "केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र के इस्तीफे की मांग के बहाने आयोजित इस तथाकथित विरोध प्रदर्शन" में ऐसे लोग और तत्व शामिल हुए, जिनकी गतिविधियां और बयान भारत-विरोधी एजेंडे से प्रेरित लगते हैं।
याचिका में कहा गया,
"अरुंधति रॉय, जिन्होंने कश्मीर के मुद्दे पर बार-बार विवादित बयान दिए और ऐसे विचार व्यक्त किए हैं, जिनमें कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग नहीं माना गया, वे भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं। ऐसे कार्यक्रम में उनकी भागीदारी इस जमावड़े के पीछे के असली मकसद और उद्देश्यों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती है।"
इसमें आगे कहा गया कि कई राजनीतिक नेताओं ने इस विरोध प्रदर्शन को अपने हाथ में ले लिया और इसे प्रभावित किया, जिससे प्रदर्शनकारियों को उकसाया गया। इसमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, आतिशी मार्लेना, डिंपल यादव, धर्मेंद्र यादव और चंद्रशेखर आज़ाद के नाम शामिल हैं।
इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि इन नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर प्रदर्शनकारियों को हिंसा करने के लिए उकसाया और संसद भवन के गेट तोड़ने की कोशिश की।
याचिकाकर्ता का कहना है,
"इस घटना को केवल सार्वजनिक विरोध का मामला नहीं माना जाना चाहिए और न ही इसे सामान्य FIR दर्ज करने तक सीमित रखा जाना चाहिए। संसद भवन परिसर में घुसने की कथित कोशिश और इसमें संगठित या बाहरी तत्वों की भागीदारी की संभावना को देखते हुए असली तथ्यों का पता लगाने, जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और घटना के पीछे किसी बड़ी साजिश की जांच करने के लिए एक विशेष राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से व्यापक जांच कराना जरूरी है।"
याचिका में 20 जुलाई की घटनाओं की जांच NIA या किसी अन्य विशेष एजेंसी को सौंपने का निर्देश देने की मांग की गई।
इसमें यह भी मांग की गई कि संबंधित एजेंसी को विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज सभी FIR की जांच अपने हाथ में लेनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हिंसा, तोड़फोड़, आपातकालीन सेवाओं में बाधा डालने और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए कथित तौर पर जिम्मेदार सभी लोगों की पहचान की जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए।
Title: SATISH KUMAR AGGARWAL v. UNION OF INDIA & ORS


