दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका: वकीलों को धमकाने और AK-47 वाली टिप्पणी को लेकर ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ कार्रवाई की मांग
Shahadat
3 Nov 2026 6:48 PM IST

पुलिस और वकीलों के बीच चल रहे विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इसमें ACP मनस्वी वशिष्ठ और दिल्ली पुलिस के कुछ अन्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। इन पर वकीलों को धमकाने, डराने-धमकाने और उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
वकील करण बीर सिंह द्वारा दायर इस याचिका में वकीलों की पेशेवर स्वतंत्रता और गरिमा की सुरक्षा की मांग की गई। साथ ही इसमें आरोप लगाया गया कि पुलिसकर्मी अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
याचिका में भारत सरकार (यूनियन ऑफ इंडिया), दिल्ली पुलिस कमिश्नर, स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (सतर्कता), ACP मनस्वी वशिष्ठ और सब-इंस्पेक्टर विशाल यादव को प्रतिवादी (Respondents) बनाया गया।
सिंह का आरोप है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में ACP वशिष्ठ वकीलों को धमकाते और उनके खिलाफ अपमानजनक बातें कहते दिख रहे हैं। इनमें एक टिप्पणी यह भी है कि अगर वकील समूहों में पुलिस स्टेशन आते हैं, तो उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है।
याचिका में सब-इंस्पेक्टर विशाल यादव के एक कथित वीडियो का भी जिक्र है, जिसमें वे एक वकील को धमकी देते हुए कहते हैं कि अगर वकील ने उन पर हाथ उठाया, तो वे AK-47 राइफल से गोली चला देंगे।
सिंह ने कहा कि अगर ये आरोप सच साबित होते हैं तो यह आपराधिक धमकी, पुलिस अधिकारों के दुरुपयोग और अपने पेशेवर कर्तव्यों का पालन कर रहे वकीलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है।
सिंह का आरोप है कि पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन में शामिल होना 'पुलिस बल (अधिकारों पर प्रतिबंध) अधिनियम, 1966' (Police Forces (Restriction of Rights) Act, 1966) और लागू सेवा व आचरण नियमों के तहत जांच का विषय है।
याचिका में कहा गया कि ACP मनस्वी वशिष्ठ को कथित तौर पर सस्पेंड कर दिया गया। हालांकि, इसमें तर्क दिया गया कि केवल सस्पेंड कर देने से आपराधिक धमकी, अन्य पुलिस अधिकारियों के आचरण और संस्थागत सुरक्षा उपायों की जरूरत से जुड़े व्यापक आरोपों का समाधान नहीं होता है।
याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई ताकि वकीलों की सुरक्षा, गरिमा और पेशेवर स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके।
इसमें यह भी मांग की गई कि सोशल मीडिया पर मौजूद उन वीडियो और पोस्ट को हटाया जाए जिनमें गैर-कानूनी धमकियां दी गईं, लेकिन ऐसा करने से पहले मूल इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित (Preserve) कर लिया जाए।
इसके अलावा, इसमें संबंधित पुलिस अधिकारियों के कथित कदाचार की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने, तथा जहां जरूरी हो, उनके खिलाफ आपराधिक और विभागीय कार्रवाई करने की भी मांग की गई है। संदर्भ के लिए, बताया जा रहा है कि ACP मनस्वी वशिष्ठ को "अनुशासन के उल्लंघन" के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है।
यह कार्रवाई तब हुई, जब वकीलों के साथ झड़प के बाद, ACP के नेतृत्व में दिल्ली पुलिस के जवानों ने कल (सोमवार) पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर 1 के बाहर लगभग 100 पुलिसकर्मी इकट्ठा हुए, जिनमें ACP वशिष्ठ भी शामिल हो गए।
वे शाहदरा पुलिस स्टेशन में वकीलों के साथ हुई हालिया घटना को लेकर पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार से मुलाकात की मांग कर रहे थे।
वकील ललित बंसल से जुड़े मारपीट के मामले को संभालने के तरीके को लेकर शहर के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी, जिसके बाद ACP वशिष्ठ और शाहदरा पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) अरुण कुमार का तबादला कर दिया गया था।
इसके बाद, विभिन्न जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। उनका आरोप था कि जब वे मारपीट के मामले को लेकर पुलिस स्टेशन गए तो ACP वशिष्ठ और अरुण कुमार ने उन्हें धमकी दी थी। उन्होंने इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

