'सिर्फ़ कानून-व्यवस्था बनाए रखना मकसद': जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के आरोपों वाली PIL का दिल्ली पुलिस ने किया विरोध
Shahadat
20 July 2026 8:15 PM IST

दिल्ली पुलिस ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में उस जनहित याचिका (PIL) का विरोध किया, जिसमें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की "लगातार निगरानी" का आरोप लगाया गया।
दिल्ली पुलिस की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच को बताया कि जिन उपायों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वे सिर्फ़ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए थे और इन्हें निगरानी या जासूसी नहीं कहा जा सकता।
मेहता ने कहा,
"जंतर-मंतर पर कोई न कोई प्रदर्शन चलता ही रहता है। हर प्रदर्शन को हमेशा रिकॉर्ड किया जाता है। इस प्रदर्शन में भी असल में, सैकड़ों लोग वीडियो और रील बनाते और उन्हें वायरल करते हुए देखे जा सकते हैं। यह सिर्फ़ कानून-व्यवस्था के मकसद से किया जाता है। इसमें कोई जासूसी या निगरानी नहीं हो रही है।"
याचिका को "लक्ज़री लिटिगेशन" (बिना ज़रूरत का मुकदमा) बताते हुए मेहता ने पुलिस पर लगाए गए आरोपों का विरोध किया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 'मज़दूर किसान शक्ति संगठन बनाम भारत संघ' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज़िक्र किया और पूछा कि क्या प्रदर्शनों और भूख हड़तालों को रेगुलेट करने के लिए कोई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) या गाइडलाइंस मौजूद हैं।
अब इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
यह PIL जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने दायर की। उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की पुलिस लगातार फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी कर रही है।
याचिका के अनुसार, 20 जून को जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के धरने और भूख हड़ताल की शुरुआत के बाद से ही प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए एक स्थायी निगरानी टॉवर के ज़रिए प्रदर्शनकारियों पर चौबीसों घंटे नज़र रखी जा रही है।
याचिका में कहा गया कि यह निगरानी बिना किसी भेदभाव के की जा रही है और इसमें स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति शामिल है, चाहे उस पर गैर-कानूनी गतिविधि का कोई शक हो या न हो। इसमें आरोप लगाया गया है कि निगरानी में न सिर्फ़ प्रदर्शन से जुड़ी गतिविधियां, बल्कि खाना-पीना, आराम करना और मेडिकल मदद लेना जैसी आम रोज़मर्रा की गतिविधियां भी शामिल हैं।
Title: MS. AISHE GHOSH v. UNION OF INDIA & ANR


