AGMUT कैडर के IAS अधिकारियों पर गृह मंत्रालय को कार्रवाई का अधिकार : दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
1 April 2026 3:49 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में स्पष्ट किया कि गृह मंत्रालय AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के IAS अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और दंड देने के लिए विधिक रूप से सक्षम है।
जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने कहा कि संयुक्त कैडर प्राधिकरण के प्रतिनिधि के रूप में गृह मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई को कानून के अधिकार से बाहर नहीं माना जा सकता।
यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को चुनौती दी थी।
अधिकरण ने पहले यह कहा था कि गृह मंत्रालय को ऐसे मामलों में अधिकार क्षेत्र नहीं है और केवल वही राज्य सरकार कार्रवाई कर सकती है, जहां अधिकारी तैनात है।
हाईकोर्ट ने अधिकरण के इस निष्कर्ष को गलत ठहराते हुए कहा कि अधिकार क्षेत्र के अभाव के आधार पर प्रारंभिक स्तर पर हस्तक्षेप करना उचित नहीं था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिकरण ने नियमों की संकीर्ण और अलग-थलग व्याख्या की थी।
खंडपीठ ने कहा कि अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969, भारतीय प्रशासनिक सेवा (कैडर) नियम, 1954 और संयुक्त कैडर नियम, 1972 को समग्र रूप से पढ़ना आवश्यक है।
इन नियमों की संयुक्त व्याख्या से यह स्पष्ट होता है कि संयुक्त कैडर के मामलों में अधिकार संयुक्त कैडर प्राधिकरण के माध्यम से संचालित होता है।
अदालत ने यह भी कहा कि AGMUT कैडर के अधिकारी राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेशों में भी कार्य करते हैं और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए गृह मंत्रालय प्रशासनिक मंत्रालय है। इसलिए अनुशासनात्मक मामलों में उसे नोडल एजेंसी बनाना प्रशासनिक दृष्टि से भी उचित है।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि संबंधित अधिकारियों की ओर से यह साबित नहीं किया जा सका कि गृह मंत्रालय की कार्रवाई किसी नियम के खिलाफ या स्पष्ट निषेध के विरुद्ध थी।
अंततः अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि 1969 के नियमों में औपचारिक संशोधन नहीं हुआ गृह मंत्रालय के अधिकार को नकारा नहीं जा सकता।
इस प्रकार, अधिकरण का आदेश आंशिक रूप से निरस्त करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के पक्ष में निर्णय दिया।

