चार्जशीट दाखिल करने में बहुत ज़्यादा देरी से आरोपी के तेज़ी से जांच और ट्रायल के अधिकार का उल्लंघन होता है: दिल्ली हाईकोर्ट
Shahadat
9 Oct 2026 10:13 AM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि चार्जशीट दाखिल करने में बहुत ज़्यादा देरी से भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के तेज़ी से जांच और ट्रायल के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो सकता है।
जस्टिस अरुण भारद्वाज ने आबकारी (Excise) मामले में एक व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द किया, जिसमें FIR दर्ज होने के लगभग आठ साल बाद चार्जशीट दाखिल की गई।
कोर्ट ने कहा कि हालांकि जांच पूरी करने के लिए समय-सीमा तय करना मुश्किल हो सकता है, लेकिन उन्हें अनिश्चित काल तक जारी नहीं रहने दिया जा सकता।
कोर्ट ने कहा,
"...जांच का समय पर पूरा होना आरोपी का एक महत्वपूर्ण अधिकार है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित है।"
इस बात पर ज़ोर दिया गया कि तेज़ी से ट्रायल में जांच, पूछताछ, ट्रायल और अपील के सभी चरण शामिल हैं, जो आरोप से लेकर अंतिम फैसले तक चलते हैं। औपचारिक आरोप और ट्रायल के बीच अनुचित देरी से आरोपी के बचाव पक्ष पर बुरा असर पड़ने का खतरा रहता है।
जज ने कहा,
"...जांच पूरी करने के लिए समय-सीमा तय करना मुश्किल है, लेकिन साथ ही यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि चार्जशीट दाखिल होने तक जांच लंबे समय तक नहीं चल सकती और मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर एक उचित समय-सीमा के भीतर जांच पूरी की जानी चाहिए।"
कोर्ट जयवीर सिंह द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें जनवरी 2015 में दिल्ली आबकारी अधिनियम, 2009 की धारा 33 और 38 के तहत दर्ज FIR से उत्पन्न आपराधिक कार्यवाही को जारी रखने को चुनौती दी गई।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट के समक्ष चार्जशीट FIR दर्ज होने के लगभग आठ साल बाद 4 नवंबर 2022 को दाखिल की गई थी। कोर्ट ने देखा कि चार्जशीट एक हेड कॉन्स्टेबल ने तैयार की थी और संबंधित असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (ACP) ने इसे 4 मई, 2018 को ट्रायल कोर्ट को भेजा था। हालाँकि, इसे ट्रायल कोर्ट के सामने 3 नवंबर, 2022 को ही पेश किया गया।
कोर्ट ने पाया कि भले ही देरी के लिए हेड कॉन्स्टेबल के खिलाफ़ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई, लेकिन इससे न तो चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी को सही ठहराया जा सकता था और न ही आरोपी को कोई राहत मिल सकती थी, जिसे इतनी देर से आपराधिक मुकदमे का सामना करना पड़ रहा था।
कोर्ट ने यह भी देखा कि यह देरी जाँच अधिकारियों के नियंत्रण से बाहर की वजहों से नहीं हुई।
कोर्ट ने कहा,
"इन हालात में यह कोर्ट मानता है कि चार्जशीट दाखिल करने में हुई बहुत ज़्यादा देरी ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन किया है।"
Case Title : JAIVEER SINGH v. STATE (N.C.T. OF DELHI)

