दिल्ली हाईकोर्ट ने 100% दृष्टिहीन महिला को पिता की आपत्ति के बावजूद अपने पार्टनर के साथ रहने की इजाज़त दी
Shahadat
6 May 2026 9:27 AM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक 100% दृष्टिहीन वयस्क महिला को अपनी पसंद के पार्टनर के साथ रहने की इजाज़त दी। कोर्ट ने दोहराया कि एक वयस्क व्यक्ति को, माता-पिता की आपत्तियों की परवाह किए बिना, अपना निवास स्थान चुनने की पूरी आज़ादी होती है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच महिला के पार्टनर द्वारा दायर 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि महिला के माता-पिता उसे उसकी मर्ज़ी के खिलाफ ज़बरदस्ती अपने पास रोककर रखे हुए हैं।
कोर्ट के पिछले निर्देशों के पालन में महिला खुद बेंच के सामने पेश हुई। कोर्ट ने महिला, उसके पिता और याचिकाकर्ता - तीनों से बातचीत की।
इस बातचीत के दौरान, महिला ने साफ तौर पर याचिकाकर्ता के साथ रहने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की और बताया कि वे दोनों शादी करने का इरादा रखते हैं। याचिकाकर्ता ने भी महिला को अपने साथ रखने की अपनी सहमति जताई।
हालांकि, महिला के पिता ने इस रिश्ते का विरोध किया और कहा कि अगर उनकी बेटी याचिकाकर्ता के साथ जाने का फैसला करती है तो वह अपनी बेटी से सारे रिश्ते तोड़ देंगे।
महिला के स्पष्ट और अपनी मर्ज़ी से दिए गए बयान को ध्यान में रखते हुए,कोर्ट ने फैसला सुनाया कि चूंकि महिला वयस्क है, इसलिए उसे अपना निवास स्थान चुनने की पूरी आज़ादी है। तदनुसार, कोर्ट ने उसे याचिकाकर्ता के साथ जाने की इजाज़त दी।
फिर भी इस मामले की संवेदनशीलता और याचिकाकर्ता द्वारा जताई गई आशंकाओं को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार से अनुरोध किया कि वह यह सुनिश्चित करे कि इन दोनों को उस जगह तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए एक एस्कॉर्ट (सुरक्षाकर्मी) मुहैया कराया जाए, जहाँ वे फिलहाल रहना चाहते हैं।
इसके अलावा, एक 'बीट कांस्टेबल' को निर्देश दिया गया कि वह इन दोनों के साथ अपने संपर्क विवरण (Contact Details) साझा करे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें तत्काल सहायता मिल सके।
Case title: Ram Kripal v. State

