दोषसिद्धि के बाद अच्छा आचरण दिखाकर चुनावी अयोग्यता कम नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

Praveen Mishra

16 March 2026 3:29 PM IST

  • दोषसिद्धि के बाद अच्छा आचरण दिखाकर चुनावी अयोग्यता कम नहीं कर सकते: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दोषसिद्धि (conviction) के बाद किसी व्यक्ति का अच्छा आचरण मात्र चुनाव लड़ने से संबंधित अयोग्यता की अवधि घटाने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा स्वीकार किया जाता है तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act) की मंशा कमजोर पड़ जाएगी।

    जस्टिस अमित बंसल ने यह टिप्पणी एक याचिका खारिज करते हुए की, जिसमें बाला जी नामक व्यक्ति ने चुनाव आयोग के उस निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी चुनावी अयोग्यता की अवधि कम करने से इनकार किया गया था।

    मामले में बाला जी को वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 326 और 149 के तहत दोषी ठहराया था। यह मामला 1993 की एक घटना से संबंधित था, जिसमें उसे सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई थी।

    दो वर्ष से अधिक की सजा होने के कारण बाला जी पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत अयोग्यता लागू हो गई, जिसके अनुसार व्यक्ति सजा की अवधि के दौरान और रिहाई के बाद छह वर्ष तक चुनाव नहीं लड़ सकता।

    हालांकि, जेल सलाहकार बोर्ड की सिफारिश पर अच्छे आचरण के आधार पर उसे जून 2021 में समय से पहले रिहा कर दिया गया। इसके बाद उसने अगस्त 2025 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 11 के तहत चुनाव आयोग से अयोग्यता की अवधि कम करने की मांग की। उसने अपनी याचिका में जेल में अच्छा आचरण, समय से पहले रिहाई और रिहाई के बाद सामाजिक योगदान का हवाला दिया था।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने दिसंबर 2025 में उसकी याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद उसने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

    हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही धारा 11 के तहत चुनाव आयोग को विवेकाधीन शक्ति दी गई है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को यह अधिकार मिल जाता है कि उस शक्ति का प्रयोग उसके पक्ष में ही किया जाए।

    अदालत ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8 दोषसिद्धि के आधार पर उम्मीदवार की अयोग्यता को स्पष्ट रूप से निर्धारित करती है, जबकि धारा 11 एक अपवाद (exception) के रूप में है और इसका प्रयोग केवल विशेष और असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि के बाद अच्छा आचरण दिखाना अयोग्यता की अवधि कम करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता, क्योंकि ऐसा करने से अधिनियम के प्रावधानों की मंशा कमजोर पड़ जाएगी।

    इस आधार पर अदालत ने याचिका खारिज करते हुए चुनाव आयोग के निर्णय को सही ठहराया।

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