दिल्ली हाईकोर्ट ने जबरन वसूली के मामले में सुकेश चंद्रशेखर के कथित साथियों को ज़मानत दी, लंबी जेल और लंबे समय से चल रहे ट्रायल का हवाला दिया
Shahadat
8 July 2026 10:11 AM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े 217 करोड़ रुपये के जबरन वसूली मामले में आरोपी अरुण मुथु, बी. मोहनराज, सुधीर और कमलेश कोठारी को ज़मानत दी। [2026 LiveLaw (Del) 633]
जस्टिस प्रतीक जालान ने मुख्य रूप से लंबी जेल और ट्रायल के जल्द खत्म होने की संभावना न होने के आधार पर यह राहत दी।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि मुथु, सुकेश चंद्रशेखर और लीना पॉलोस का करीबी सहयोगी था और उसने अपराध से मिली रकम को मैनेज करने में उनकी मदद की थी।
चार्जशीट के अनुसार, मुथु ने लग्ज़री कारें और प्रॉपर्टी खरीदने में मदद की, फाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन में सहायता की, लीना के लिए प्रोप्राइटरशिप फर्म 'LS Film Corp' खोली, अपने साथियों के ज़रिए लगभग 3 करोड़ रुपये की बैंकिंग एंट्रीज़ का इंतज़ाम किया और एक वेब सीरीज़ बनाने में मदद की।
यह भी आरोप लगाया गया कि मुथु ने लीना की कंपनी में फंड ट्रांसफर किया, उसके निर्देश मिलने पर 7 से 8 लग्ज़री कारें पार्क कीं और ट्रांज़ैक्शन पर 2.5% कमीशन कमाया।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि मुथु पर शिकायतकर्ता या किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ जबरन वसूली की कथित घटनाओं में शामिल होने का आरोप नहीं था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसकी भूमिका सुकेश द्वारा लीना को भेजे गए फंड की प्लानिंग और मैनेजमेंट में थी, जिसमें अकाउंटिंग एंट्रीज़, प्रॉपर्टी और लग्ज़री कारों की खरीद, उन कारों की पार्किंग का इंतज़ाम और एक फिल्म का प्रोडक्शन शामिल था।
कोर्ट ने कहा,
"आरोप है कि इन कामों के लिए उसे कमीशन के तौर पर पैसे मिलते थे। इसी संदर्भ में उस पर लीना और सुकेश (जब वह पैरोल पर था) के साथ बार-बार मीटिंग करने का आरोप है। अन्य सह-आरोपियों और अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए गवाहों के बयान प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की भूमिका इससे ज़्यादा नहीं बताते हैं।"
उसे ज़मानत देते हुए कोर्ट ने कहा कि MCOCA की धारा 3(4) के तहत सज़ा पाँच साल से लेकर उम्रकैद तक हो सकती है, लेकिन 24 आरोपियों, 403 गवाहों और केस की जटिलता जैसे कारणों से कार्यवाही का जल्द पूरा होना मुश्किल लगता है।
कोर्ट ने साफ़ किया कि आदेश में की गई कोई भी टिप्पणी सिर्फ़ मुथु की ज़मानत अर्ज़ी पर फ़ैसला करने के मकसद से थी और इसका असर न तो ट्रायल की कार्यवाही पर पड़ेगा और न ही इसे केस की मेरिट पर कोई राय माना जाएगा।
सभी चार आरोपियों के लिए ज़मानत के ऐसे ही आदेश देते हुए कोर्ट ने सह-आरोपी लीना पॉलोस के मामले में फ़र्क किया। उसकी ज़मानत अर्ज़ी इस साल मई में खारिज कर दी गई, क्योंकि पाया गया कि उस पर लगे आरोपों के कारण वह कथित संगठित अपराध सिंडिकेट के केंद्र में थी; और उसका मामला उन दूसरे आरोपियों से अलग था जिन्हें बाद में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया।
Title: ARUN MUTHU v. STATE OF NCT DELHI and other connected matters


