ISIS से जुड़े टेरर मॉड्यूल को हथियार सप्लाई के आरोपी को 7.5 साल जेल में रहने के बाद मिली ज़मानत

  • ISIS से जुड़े टेरर मॉड्यूल को हथियार सप्लाई के आरोपी को 7.5 साल जेल में रहने के बाद मिली ज़मानत

    दिल्ली हाईकोर्ट ने ISIS से जुड़े कथित टेरर मॉड्यूल को हथियार हासिल करने में मदद करने के आरोपी व्यक्ति को ज़मानत दी। कोर्ट ने यह देखते हुए ज़मानत दी कि वह साढ़े सात साल से ज़्यादा समय से हिरासत में है और निकट भविष्य में ट्रायल पूरा होने की कोई संभावना नहीं है।

    जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीज़न बेंच ने नईम नाम के व्यक्ति की याचिका को मंज़ूरी दी। नईम ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उसकी ज़मानत याचिका खारिज की गई। यह मामला नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), भारतीय दंड संहिता (IPC) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज किया।

    कोर्ट ने गौर किया कि ट्रायल में 112 गवाहों में से केवल 42 से ही पूछताछ की गई, जबकि नईम जनवरी 2019 से हिरासत में है।

    कोर्ट ने कहा,

    "सबूतों की प्रकृति और ट्रायल पूरा होने में हो रही देरी को देखते हुए हमारी राय है कि अपीलकर्ता ज़मानत पर रिहा होने का मामला बनाने में सफल रहा है।"

    NIA का आरोप है कि नईम उस ग्रुप के लिए हथियार और गोला-बारूद का इंतज़ाम करने में अहम भूमिका निभा रहा था, जो कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की साज़िश में शामिल था।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, नईम ने मेरठ में हथियार डीलरों से हथियार हासिल करने में मदद की और मुख्य आरोपी मुफ़्ती मोहम्मद सुहैल को उनसे मिलवाया।

    अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि नईम ने जुलाई और अगस्त 2018 में दो लेन-देन में मदद की, जिसमें देसी पिस्तौल, कट्टा और गोला-बारूद की सप्लाई शामिल थी। उसने यह भी दावा किया कि उसे पता था कि हथियारों का इस्तेमाल नागरिकों को निशाना बनाने और दहशत फैलाने के लिए किया जाएगा।

    ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए NIA ने तर्क दिया कि नईम कथित साज़िश का सक्रिय सदस्य था और वह केवल इसलिए बेगुनाही का दावा नहीं कर सकता कि उसकी भूमिका अन्य आरोपियों से अलग थी।

    उसने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) का भी हवाला दिया, जिनसे कथित तौर पर यह साबित हुआ कि नईम और अन्य आरोपी एक साथ यात्रा कर चुके थे। हालांकि, नईम के वकील ने दलील दी कि वह सात साल और आठ महीने से ज़्यादा समय से हिरासत में है और मुकदमे के जल्द खत्म होने की कोई उम्मीद नहीं है। यह भी बताया गया कि उसके पास से दो मोबाइल फोन के अलावा कोई भी आपत्तिजनक चीज़ बरामद नहीं हुई।

    रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच करने के बाद कोर्ट ने पाया कि जिन तीन गवाहों से मुकदमे के दौरान पहले ही पूछताछ हो चुकी थी, उनके बयानों से नईम को ज़मानत देने से इनकार करने का कोई आधार नहीं मिलता।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि उनसे पूछताछ के बाद अपीलकर्ता द्वारा मुकदमे को प्रभावित करने की संभावना कम हो गई, या शायद खत्म ही हो गई।

    कोर्ट ने आगे कहा कि हालांकि अभियोजन पक्ष का यह तर्क सही है कि साज़िश में नईम की कथित भूमिका को अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता। फिर भी उन्हें यह साबित करना होगा कि उसने एक साझा इरादे को आगे बढ़ाने के लिए काम किया और उसे साज़िश के साझा मकसद की जानकारी थी।

    कोर्ट ने कहा,

    "इस अपील में भी, हालांकि अपीलकर्ता 03.01.2019 से हिरासत में है, यानी 7 ½ साल से ज़्यादा समय से मुकदमे में 112 में से केवल 42 गवाहों से ही पूछताछ हुई है। मुकदमे के जल्द खत्म होने की कोई संभावना नहीं है।"

    कोर्ट ने आगे कहा,

    "सबूतों की प्रकृति और मुकदमे के खत्म होने में हो रही देरी को देखते हुए हमारी राय है कि अपीलकर्ता ज़मानत पर रिहा होने का मामला बनाने में सफल रहा है।"

    ज़मानत देते हुए बेंच ने नईम को 50,000 रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही राशि की दो ज़मानत देने का निर्देश दिया।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां केवल ज़मानत पर विचार करने तक सीमित थीं और उन्हें मामले के गुण-दोष पर निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

    Case Title : NAIM @MOHD. NAEEM v. NATIONAL INVESTIGATION AGENCY

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