स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक मामले में कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड का आदेश रद्द, आपत्ति पर निर्णय न देने पर दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार

Amir Ahmad

6 May 2026 5:14 PM IST

  • स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक मामले में कॉन्ट्रैक्ट लेबर बोर्ड का आदेश रद्द, आपत्ति पर निर्णय न देने पर दिल्ली हाईकोर्ट की फटकार

    दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से जुड़े संविदा श्रमिक विवाद में केंद्रीय सलाहकार संविदा श्रम बोर्ड की कार्रवाई रद्द की। अदालत ने कहा कि बोर्ड ने अधिकार-क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण आपत्ति पर निर्णय ही नहीं दिया और बिना कारण बताए जांच आगे बढ़ाने का आदेश पारित किया।

    जस्टिस शैल जैन की सिंगल बेंच ने बोर्ड की 90वीं बैठक में लिए गए उस निर्णय को निरस्त किया, जिसमें समिति को बैंक की मुंबई शाखाओं में संविदा श्रमिकों की नियुक्ति संबंधी जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।

    अदालत ने कहा कि बैंक ने स्पष्ट रूप से यह आपत्ति उठाई कि वर्ष 2008 में बंद हो चुके मामले को दोबारा खोलने का बोर्ड के पास अधिकार नहीं है, क्योंकि संविदा श्रम (विनियमन एवं उन्मूलन) अधिनियम, 1970 बोर्ड को पुनर्विचार की शक्ति नहीं देता।

    हाईकोर्ट ने पाया कि यद्यपि बैंक की आपत्ति बैठक की कार्यवाही में दर्ज की गई, लेकिन उस पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया गया।

    बेंच ने कहा,

    “बोर्ड का दायित्व केवल औपचारिक सुनवाई देना नहीं था बल्कि उसके समक्ष उठाई गई आपत्तियों पर विचार कर उनका विधिसम्मत निर्णय देना भी आवश्यक था। केवल दलीलों को दर्ज कर लेना निर्णय नहीं माना जा सकता।”

    अदालत ने बोर्ड की इस दलील को भी खारिज किया कि इस चरण पर उसे अधिकार-क्षेत्र संबंधी आपत्ति पर निर्णय देना आवश्यक नहीं था।

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही बोर्ड के लिए इसे प्रारंभिक मुद्दे के रूप में तय करना अनिवार्य न हो, लेकिन जब आपत्ति उठाई गई और रिकॉर्ड पर ली गई तब उस पर विचार कर कारणयुक्त निर्णय देना आवश्यक था।

    बेंच ने आगे कहा कि बोर्ड का आदेश 'नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर' है, क्योंकि उसमें यह नहीं बताया गया कि आपत्ति के बावजूद जांच आगे बढ़ाने का निर्णय किन कारणों से लिया गया।

    अदालत ने कहा,

    “आदेश में न कोई चर्चा है, न विश्लेषण और न ही यह संकेत कि बोर्ड ने किन कारणों से आपत्ति को नज़रअंदाज़ किया। ऐसा दृष्टिकोण विधि सम्मत नहीं है।”

    हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध निर्णय सीमेंस इंजीनियरिंग एंड मैन्युफैक्चरिंग बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा कि अर्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के लिए स्पष्ट और कारणयुक्त आदेश देना अनिवार्य है।

    इन टिप्पणियों के साथ अदालत ने बोर्ड का आदेश रद्द कर मामला नए सिरे से विचार के लिए बोर्ड को वापस भेज दिया।

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