CBSE On-Screen Marking: पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी शिकायतों के लिए छात्रों को अलग-अलग आवेदन करना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट, PIL खारिज

Shahadat

7 Sept 2026 8:25 PM IST

  • CBSE On-Screen Marking: पुनर्मूल्यांकन से जुड़ी शिकायतों के लिए छात्रों को अलग-अलग आवेदन करना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट, PIL खारिज

    दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ़ इंडिया (NSUI) की PIL (जनहित याचिका) खारिज कर दी। इस याचिका में सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के नए शुरू किए गए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में "बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और कमियों" का आरोप लगाया गया।

    चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि आंसर शीट के री-इवैल्यूएशन की मांग एक व्यक्तिगत मामला है, जिसे संबंधित छात्र उठा सकते हैं, लेकिन ऐसी मांग PIL के ज़रिए नहीं की जा सकती।

    कोर्ट ने कहा कि छात्र अपनी शिकायतों के लिए CBSE या कोर्ट से संपर्क कर सकते हैं। इसके साथ ही NSUI की PIL का निपटारा किया।

    बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के 25 अगस्त के उस आदेश का भी संज्ञान लिया, जिसमें उसने CBSE को आंसर शीट के ऑन-स्क्रीन वेरिफिकेशन के लिए रिज़ल्ट के बाद वाली विंडो (Post-Result window) फिर से खोलने का निर्देश देने से इनकार किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सुधार के लिए नोटिफ़ाई की गई विंडो सभी उम्मीदवारों के लिए एक तय समय तक उपलब्ध थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि CBSE के रिज़ल्ट के आधार पर एडमिशन पहले ही हो चुके हैं, इसलिए इतनी देर से इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करना मुश्किल है।

    CBSE की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी पहलुओं पर विचार किया और फिर यह निष्कर्ष निकाला था कि रिज़ल्ट के बाद वाली विंडो को फिर से खोलने का निर्देश देना संभव नहीं है।

    NSUI के वकील ने कहा कि PIL में की गई मांग सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अलग है। उन्होंने कहा कि PIL में यह दावा किया गया कि कई छात्रों ने री-वेरिफिकेशन या री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    उन्होंने कहा कि भले ही पोर्टल दोबारा न खोला जाए, लेकिन CBSE को उन छात्रों के अनुरोध का जवाब ज़रूर देना चाहिए, जिन्होंने री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन किया।

    इस पर कोर्ट ने वकील से सवाल किया कि पोर्टल खोले बिना री-इवैल्यूएशन या री-वेरिफिकेशन कैसे संभव हो सकता है।

    कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए याचिका का निपटारा किया,

    “कानून साफ़ है। अगर कोई प्रावधान नहीं है तो कोर्ट दोबारा मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) का आदेश नहीं दे सकता। अलग-अलग छात्रों को खुद आना होगा... अगर आप कह रहे हैं कि छात्र अपनी आंसर शीट का दोबारा मूल्यांकन चाहते हैं, तो यह उन छात्रों को करना होगा; उन्हें ही CBSE और कोर्ट से संपर्क करना होगा। आपको नहीं।”

    इसके साथ ही मामले में आगे कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया गया।

    NSUI के अध्यक्ष विनोद झाखड़ के ज़रिए दायर इस PIL में OSM सिस्टम से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों और शिकायतों के समाधान में नाकामियों का हवाला देते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की गई। गर्मी की छुट्टियों के दौरान एक बेंच ने इस याचिका पर जून में नोटिस जारी किया।

    NSUI ने दावा किया कि यह PIL व्यापक जनहित में उन लाखों छात्रों की ओर से दायर की गई, जो CBSE द्वारा OSM सिस्टम के तहत आयोजित 12वीं कक्षा की परीक्षाओं में शामिल हुए।

    याचिका में कहा गया कि यह सिस्टम आंसर शीट को स्कैन करने और उनका मूल्यांकन करने के डिजिटल तरीके के तौर पर शुरू किया गया। हालांकि, नतीजे घोषित होने के बाद, देश भर में बड़ी संख्या में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने धुंधले स्कैन, गायब पन्नों, अधूरे अपलोड, आंसर शीट के गलत मिलान, उम्मीद से कम मार्क्स और मैन्युअल वेरिफिकेशन (हाथ से जांच) के लिए किसी ठोस व्यवस्था की कमी को लेकर चिंता जताई।

    इसमें आगे कहा गया कि यह आंकड़ा “इस प्रक्रिया को लेकर छात्रों में चिंता और भरोसे की कमी के असाधारण स्तर” को दिखाता है।

    इसमें कहा गया कि मौजूदा शिकायत निवारण व्यवस्था नाकाफी है और छात्रों के पास सीमित डिजिटल उपाय ही बचे हैं। साथ ही, विवादित आंसर शीट की मैन्युअल जांच या स्वतंत्र री-चेकिंग के लिए कोई ठोस प्रक्रिया नहीं है।

    NSUI ने कहा कि सुधार की ठोस व्यवस्था न होने से नुकसान और बढ़ जाता है, क्योंकि विवाद अनसुलझे रहते हैं और एकेडमिक कैलेंडर आगे बढ़ता रहता है।

    इसलिए याचिका में वेरिफिकेशन पोर्टल को एक महीने के लिए फिर से खोलने और विवादित मामलों में मैन्युअल री-चेकिंग और फिजिकल वेरिफिकेशन की इजाज़त देने की मांग की गई।

    इसमें केंद्र सरकार की सीधी निगरानी और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की गई ताकि भविष्य के डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम के लिए उचित सुरक्षा उपाय और गाइडलाइंस बनाई जा सकें।

    यह याचिका वकील ऋषभ रंजन, अजय छिकारा, उमर होडा, ईशा बख्शी और शुभम मिश्रा के ज़रिए दायर की गई।

    Title: NATIONAL STUDENTS' UNION OF INDIA v. UNION OF INDIA & ANR

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