एडवोकेट की कानूनी सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में नहीं आतीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

  • एडवोकेट की कानूनी सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण कानून के दायरे में नहीं आतीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

    आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने दोहराया है कि अधिवक्ताओं द्वारा दी गई कानूनी सेवाओं में कथित कमी (Deficiency in Service) को लेकर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने कहा कि एडवोकेट और क्लाइंट के बीच संबंध "व्यक्तिगत सेवा के अनुबंध (Contract of Personal Service)" का होता है, जिसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में "सेवा" की परिभाषा से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।

    जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस सुभेंदु सामंता की खंडपीठ ने एक रिट याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोगों के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें एक अधिवक्ता के खिलाफ दायर उपभोक्ता शिकायत को खारिज कर दिया गया था।

    मामले में याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक सिविल मुकदमे में उसकी ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता ने सेवा में कमी बरती। इस आधार पर उसने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी। जिला आयोग ने शिकायत खारिज कर दी, जिसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने भी उस निर्णय को बरकरार रखा।

    हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता सका कि अधिवक्ता के विरुद्ध ऐसी शिकायत उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कैसे सुनवाई योग्य है। अदालत ने यह भी नोट किया कि इस मामले में राज्य बार काउंसिल के समक्ष दायर शिकायत भी पहले ही खारिज हो चुकी है।

    अदालत ने आगे कहा कि राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का वह पुराना दृष्टिकोण, जिसमें अधिवक्ताओं के विरुद्ध उपभोक्ता शिकायतों को स्वीकार किया गया था, अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून के बाद लागू नहीं रहा।

    इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि अधिवक्ताओं द्वारा प्रदान की गई कानूनी सेवाएं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के दायरे में नहीं आतीं। इसलिए ऐसी शिकायतें उपभोक्ता आयोगों में विचारणीय नहीं हैं। अदालत ने उपभोक्ता आयोगों के आदेशों में कोई कानूनी त्रुटि न पाते हुए रिट याचिका खारिज कर दी।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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