परिवार के एक सदस्य के नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

Praveen Mishra

2 Jun 2026 11:35 AM IST

  • परिवार के एक सदस्य के नौकरी में होने मात्र से अनुकंपा नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) से इनकार नहीं किया जा सकता कि मृत कर्मचारी के परिवार का कोई अन्य सदस्य सरकारी नौकरी में है। अदालत ने कहा कि संबंधित प्राधिकरण को पहले परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति और वित्तीय संकट का आकलन करना होगा।

    कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसलिए केवल तकनीकी आधारों पर दावे खारिज करना योजना की मानवीय भावना के विपरीत होगा।

    मामले में याचिकाकर्ता के पिता अंबिकापुर नगर निगम में सफाई कर्मचारी के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान उनके निधन के बाद परिवार में पत्नी, तीन पुत्र और एक पुत्री रह गए, जो उनकी आय पर निर्भर थे। याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया गया कि उसकी मां पहले से सफाई कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं।

    इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया। एकल पीठ ने नियुक्ति से इनकार करने का आदेश रद्द करते हुए नगर निगम को अनुकंपा नियुक्ति देने का निर्देश दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए नगर निगम आयुक्त ने खंडपीठ के समक्ष अपील दायर की।

    सुनवाई के दौरान निगम ने तर्क दिया कि 14 जून 2013 की राज्य नीति के अनुसार यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में है तो अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। वहीं याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी मां का वेतन बेहद कम है और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। साथ ही अधिकारियों ने परिवार की वास्तविक आर्थिक स्थिति का आकलन किए बिना आवेदन खारिज कर दिया।

    खंडपीठ ने कहा कि परिवार ने अपना मुख्य कमाने वाला सदस्य खो दिया था और केवल मां के नौकरी में होने को अनुकंपा नियुक्ति से इनकार करने का पूर्ण आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि कम वेतन वाली नौकरी करने वाला कोई सदस्य होने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि परिवार आर्थिक संकट से उबर चुका है।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति कोई अधिकार नहीं है, लेकिन यह एक कल्याणकारी और मानवीय योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक संकट में फंसे परिवारों को राहत पहुंचाना है। इसलिए अधिकारियों को दावों पर विचार करते समय व्यावहारिक और उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

    इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने नगर निगम की अपील खारिज कर दी और एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखा।

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