डॉ. बी.आर. आंबेडकर पर आपत्तिजनक Instagram पोस्ट मामले में FIR रद्द करने से इनकार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा- ट्रायल से पहले तथ्यों की जांच नहीं की जा सकती
Praveen Mishra
7 Aug 2026 12:57 PM IST

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी Instagram पर पोस्ट करने की आरोपी महिला के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया (Prima Facie) संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का खुलासा करते हैं, इसलिए इस स्तर पर कार्यवाही में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका को खारिज करते हुए की, जिसमें FIR और SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी गई थी।
अभियोजन के अनुसार, आरोपी महिला ने Instagram पर डॉ. आंबेडकर के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। इसके बाद FIR दर्ज हुई और जांच पूरी होने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 तथा SC/ST Act के तहत चार्जशीट दाखिल की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 528 के तहत याचिका पर सुनवाई करते समय अदालत साक्ष्यों की विश्वसनीयता का परीक्षण, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का मूल्यांकन या 'मिनी ट्रायल' नहीं कर सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा उठाए गए मुद्दे, जैसे टिप्पणी का संदर्भ, मंशा (Intention) और जांच में कथित खामियां, विवादित तथ्य (Disputed Questions of Fact) हैं, जिनका फैसला केवल ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर संज्ञान आदेश (Cognizance Order) को अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि उसमें SC/ST Act की धाराओं का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, खासकर तब जब आरोपी यह नहीं दिखा पाई कि इससे उसे कोई वास्तविक पूर्वाग्रह (Prejudice) हुआ है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि यह मामला उन असाधारण परिस्थितियों में नहीं आता, जहां अदालत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग कर आपराधिक कार्यवाही रद्द करे।


