मोटर दुर्घटना के दावों में उम्र के सबूत के तौर पर आधार कार्ड पर भरोसा नहीं किया जा सकता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
Shahadat
15 July 2026 8:54 AM IST

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना में मुआवज़े के मामलों में दावा करने वाले की उम्र तय करने के लिए आधार कार्ड भरोसेमंद दस्तावेज़ नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ़ इंश्योरेंस प्रीमियम मिलने से ही इंश्योरेंस कंपनी की ज़िम्मेदारी तय नहीं हो जाती, क्योंकि इंश्योरेंस का कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी में बताई गई तारीख और समय से शुरू होता है, न कि प्रीमियम मिलने की तारीख से।
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत एक सड़क दुर्घटना से जुड़े तीन मामलों की सुनवाई कर रहे थे। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके कारण उसका पैर काटना पड़ा था। टाटा सूमो के मालिक और ड्राइवर ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फ़ैसले को चुनौती देते हुए ये अपीलें दायर कीं।
मालिक का तर्क था कि भले ही इंश्योरेंस पॉलिसी में इंश्योरेंस की अवधि 20.04.2019 से शुरू हो रही थी, लेकिन प्रीमियम का भुगतान 19.04.2019 को ही इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट होने का दावा करने वाले व्यक्ति को कर दिया गया। यह प्रीमियम उसी दिन शाम 4:35 बजे इंश्योरेंस कंपनी के खाते में जमा हो गया, जो रात 10:00 बजे हुई दुर्घटना से कई घंटे पहले की बात। इसलिए तर्क दिया गया कि इंश्योरेंस कंपनी मुआवज़े का भुगतान करने के लिए ज़िम्मेदार है। दावा करने वालों ने भी ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुआवज़े को बढ़ाने के लिए क्रॉस-ऑब्जेक्शन दायर किए।
कोर्ट ने इस तर्क को खारिज किया कि सिर्फ़ इसलिए इंश्योरेंस कंपनी ज़िम्मेदार हो गई, क्योंकि दुर्घटना से पहले प्रीमियम जमा हो गया। कोर्ट ने कहा कि इंश्योरेंस का कॉन्ट्रैक्ट तभी बनता है, जब इंश्योरेंस कंपनी प्रस्ताव को स्वीकार करती है। साथ ही जोखिम शुरू होने की सही तारीख इंश्योरेंस पॉलिसी जारी होने की तारीख और समय होती है, न कि प्रस्ताव या प्रीमियम मिलने की तारीख।
कोर्ट ने कहा,
"पॉलिसी जारी होने का मतलब है कि इंश्योरेंस कंपनी ने इंश्योरेंस का कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने के लिए मालिक के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसलिए इस कोर्ट की राय में, इंश्योरेंस का कॉन्ट्रैक्ट केवल इंश्योरेंस पॉलिसी जारी होने की तारीख और समय से ही शुरू हुआ।"
चोट के मामले में मुआवज़ा बढ़ाने के दावे पर विचार करते हुए कोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने दावा करने वाले की उम्र सिर्फ़ उसके आधार कार्ड के आधार पर 68 साल तय की थी। कोर्ट ने माना कि उम्र का वह निर्धारण गलत था और रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य सबूतों के आधार पर दावा करने वाले की उम्र 61 से 65 साल के बीच तय की।
इसके अनुसार, कोर्ट ने मालिक और ड्राइवर की अपीलें खारिज कीं और तीनों दावा मामलों में दिए गए मुआवज़े की रकम बढ़ाकर दावा करने वालों की क्रॉस-आपत्तियों को आंशिक रूप से मंज़ूरी दी।
Case Title: Gopi Sahni & Anr. v. Ranjit Bhunjia & Anr. [MAC No. 213 of 2022] and connected matters


