'स्वयंभू ईश्वर' रामपाल के दामाद को 4 साल बाद मिली UAPA मामले में ज़मानत, हाईकोर्ट ने माना- सभी ज़रूरी गवाहों से पूछताछ हो चुकी है

  • स्वयंभू ईश्वर रामपाल के दामाद को 4 साल बाद मिली UAPA मामले में ज़मानत, हाईकोर्ट ने माना- सभी ज़रूरी गवाहों से पूछताछ हो चुकी है

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने खुद को भगवान बताने वाले रामपाल के दामाद संजय उर्फ़ फौजी को रेगुलर ज़मानत दी। यह मामला नवंबर 2014 में बरवाला के सतलोक आश्रम में हुई हिंसा से जुड़ा है, जिसमें हाईकोर्ट द्वारा जारी गिरफ़्तारी वारंट को लागू करने के दौरान 111 पुलिसकर्मी घायल हो गए।

    जस्टिस राजेश भारद्वाज और जस्टिस दीपक मनचंदा की डिवीज़न बेंच ने गौर किया कि अपीलकर्ता 12.08.2026 तक चार साल और इक्कीस दिन जेल में बिता चुका था। साथ ही अभियोजन पक्ष ने उन सभी 49 ज़रूरी गवाहों से पूछताछ कर ली थी, जिनके बारे में कोर्ट ने उसकी पिछली ज़मानत अर्ज़ी खारिज करते समय निर्देश दिया। इसके अलावा, मुख्य आरोपी समेत सभी सह-आरोपी पहले ही ज़मानत पर बाहर थे। [2026 LiveLaw (PH) 280]

    2014 में हिसार में IPC, आर्म्स एक्ट, गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से रोकथाम अधिनियम, 1984 की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई।

    अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि जब इंस्पेक्टर अनिल कुमार और अन्य पुलिस अधिकारी बाबा रामपाल के खिलाफ हाई कोर्ट द्वारा जारी गिरफ़्तारी वारंट को लागू करने के लिए आश्रम पहुँचे तो गेट के बाहर लगभग 600-700 महिलाएँ और बच्चे बैठे थे और छत पर लाठी, डंडे और बंदूकों से लैस 1,500-2,000 युवक तैनात थे।

    लाउडस्पीकर पर वारंट पढ़कर सुनाए जाने और CrPC की धारा 144 लागू होने की घोषणा के बाद डीज़ल और पेट्रोल के कैन लिए हुए लोग बाहर आए और पुलिस को धमकी दी। इसके बाद पत्थर फेंके गए, पुलिस पार्टी पर गोलियाँ चलाई गईं और पेट्रोल बम फेंके गए। पुलिस द्वारा लाई गई एक JCB में आग लगा दी गई और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। कुल मिलाकर 111 पुलिसकर्मी घायल हुए; इनमें से आठ को गोली लगी थी, एक जल गया था, 17 गंभीर रूप से घायल हुए थे और 85 को मामूली चोटें आई थीं।

    जांच के दौरान यह आरोप लगाया गया कि गैर-कानूनी काम करने के लिए "मिनी आर्मी" (छोटी सेना) बनाई गई। अपील करने वाले व्यक्ति, जो एक पूर्व सैनिक हैं, ने इसके सदस्यों को हथियार और लाठी चलाने की ट्रेनिंग दी थी और हथियार उनकी देखरेख में आश्रम में रखे जाते थे।

    हिसार के एडिशनल सेशन जज ने 15.04.2026 को ज़मानत देने से इनकार किया। इससे पहले, हाई कोर्ट ने 17.11.2025 को एक अपील खारिज की थी।

    नवंबर 2025 में ज़मानत खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों और तहसीलदारों सहित 49 अहम गवाहों से अभी पूछताछ होनी बाकी है। साथ ही चूंकि अपील करने वाला व्यक्ति बाबा रामपाल का दामाद है (जिनके हरियाणा में लाखों अनुयायी हैं), इसलिए इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन गवाहों को प्रभावित किया जा सकता है।

    हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को चार महीने के भीतर सभी अहम गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया और अपील करने वाले को इसके बाद अपनी अर्जी दोबारा दाखिल करने की छूट दी।

    अपील करने वाले की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट विनोद घई ने कहा कि यह घटना लगभग ग्यारह साल पुरानी है; FIR में नामजद 942 आरोपियों में से 940 को ज़मानत मिल चुकी है और UAPA के तहत आरोपी 148 लोगों में से 146 ज़मानत पर हैं; अपील करने वाले को एक सह-आरोपी के बयान के आधार पर फंसाया गया था, जो सबूत के तौर पर मान्य नहीं है।

    आगे यह भी कहा गया कि 08.04.2026 को खुद बाबा रामपाल को स्थायी ज़मानत मिलना हालात में एक बड़ा बदलाव है; तब से सभी 49 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है; और 425 गवाहों के होने के कारण ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लगेगा।

    इसका विरोध करते हुए राज्य सरकार ने कहा कि अपील करने वाला मुख्य आरोपी है, जिसने अनुयायियों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी थी और फायरिंग व पेट्रोल बम फेंकने में शामिल था; वह साढ़े सात साल तक फरार रहा, उसे 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) करार दिया गया और उसे 16.07.2021 को ही गिरफ़्तार किया गया। घोषित अपराधी वाली FIR में उसके बरी होने का आधार तकनीकी था—यानी वह मामला शिकायत के बजाय पुलिस रिपोर्ट पर आधारित था। इसमें UAPA की धारा 43-D(5) के तहत लगी रोक का हवाला दिया गया।

    अदालत ने नोट किया कि 425 गवाहों में से 65 से पूछताछ हो चुकी है, जिनमें सभी 49 अहम गवाह शामिल हैं। राज्य की ओर से यह बताए जाने पर कि 14 आरोपी अभी भी घोषित अपराधी हैं, हिसार के SSP वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए पेश हुए और अदालत को जानकारी दी कि एक SIT बनाई गई और लगभग 50 जगहों पर छापेमारी की गई; ये आरोपी नेपाल, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत अलग-अलग इलाकों से जुड़े हैं।

    Case Title: Sanjay @ Fauji v. State of Haryana

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