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"पंजाब के अधिकारी जानबूझकर ड्रग अफेंडर्स का बचाव कर रहे हैं": पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने NDPS मामले को CBI को स्थानांतरित किया

LiveLaw News Network
4 Aug 2021 10:25 AM GMT
पंजाब के अधिकारी जानबूझकर ड्रग अफेंडर्स का बचाव कर रहे हैं: पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने NDPS मामले को CBI को स्थानांतरित किया
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पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने राज्य में ड्रग अफेंडर्स से निपटने में विफल रहने के लिए पंजाब पुलिस और राज्य के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए सोमवार को NDPS मामले में जांच, जिसमें 12 लाख 'ट्रामाडोल' टैबलेट की बरामदगी शामिल थी, को CBI को स्थानांतरित कर दी।

जस्टिस अरविंद सिंह सांगवान की खंडपीठ ने इसे एक असाधारण मामला बताते हुए जांच को CBI को स्थानांतरित करते हुए कहा, "पंजाब राज्य के पदाधिकारी, कारण बखूबी वहीं जानते हैं, जानबूझकर नशीली दवाओं के अपराधियों की रक्षा कर रहे हैं।"

मामला

पीठ जालंधर जिले के भोगपुर थाने में दर्ज मादक पदार्थ मामले में सरबजीत सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

इससे पहले, कोर्ट ने ट्रामाडोल की 12 लाख टैबलेट की जब्ती की खबरों पर संज्ञान लिया था और पंजाब डायरेक्टर, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से हलफनामा मांगा था कि 12 लाख ट्रामाडोल टैबलेट की बरामदगी में एफआईआर क्यों केवल ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत दर्ज की गई थी, न कि NDPS एक्ट के तहत।

निदेशक के हलफनामे में कहा गया था कि NDPS एक्ट की धारा 22/32 के तहत अपराध किया गया था, लेकिन आज तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।

इस पर कोर्ट ने कहा, " हैरानी की बात है कि दोनों हलफनामों में कुछ भी नहीं कहा गया है कि 12.00 लाख ट्रामाडोल टैबलेट का बरामद स्टॉक कहां गया है और यहां तक ​​कि कोई बैच नंबर आदि भी नहीं दिया गया है, यह पंजाब पुलिस की ओर से और ड्रग कंट्रोलर की ओर से एक गंभीर चूक और निष्क्रियता है, और यह स्पष्ट रूप से बताता है कि पंजाब राज्य में NDPS मामलों की जांच के साथ सब कुछ सामान्य नहीं है ।"

इन तथ्यों और परिस्थितियों में, कोर्ट ने आगे कहा, "पंजाब राज्य में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है, जिनमें मुख्य रूप से ड्रग के कर‌ियर्स को NDPS एक्ट के तहत गिरफ्तार किया जाता है, लेकिन अधिकांश मामलों में ड्रग्स सप्लायर्स या सोर्स सामने नहीं आते हैं, जिसके कारण कई मामलों में आरोपी बरी हो जाते हैं।"

कोर्ट ने यह भी कहा कि पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज किए गए कई मामलों में, विशेष रूप से अमृतसर जिले में, निर्दोष व्यक्तियों पर झूठे आरोप लगाए गए थे।

नतीजतन, मामले को CBI को स्थानांतरित करते हुए, न्यायालय ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:

-CBI यह सुनिश्चित करेगी कि मेसर्स रेवेनभेल फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड के पास से बरामद पूरी प्रतिबंधित सामग्री CBI को सौंप दी जाए और यदि कोई कमी होती है, तो CBI जांच करेगी कि क्या किसी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने के लिए उसका दुरुपयोग किया जाता है;

-पंजाब पुलिस/दवा विभाग के कब्जे में बरामदगी की कमी के मामले में, CBI बैच नंबर, निर्माण/एक्सपायरी की तारीख, निर्माता का नाम देते हुए एक सूची तैयार करेगी और पंजाब राज्य में सीएफएसएल/एफएसएल से जांच करेगी कि क्या 'ट्रामाडोल' इस स्टॉक का उपयोग करके किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने के लिए किसी अन्य एफआईआर में तो शामिल नहीं किया गया है।

-ऐसी स्थिति में, CBI किसी भी पुलिस स्टेशन के रिकॉर्ड की जांच करने या समाचार पत्र में एक नोटिस प्रकाशित करने के लिए स्वतंत्र होगी, जिसमें बैच नंबर और निर्माता का नाम आदि ‌दिया हो, ताकि विभिन्न एफआईआर/मामलों में बचाव पक्ष के वकीलों को पता चल सके और इसके बारे में वे कानून के न्यायालय के समक्ष उचित कदम उठा सकें।

-एफआईआर दर्ज करने या किसी अन्य जांच में देरी करने में आईपीसी की धारा 120-बी की सहायता के तहत किसी भी लोक सेवक की संलिप्तता की जांच करना, जो वह उचित समझे।

केस टाइटिल- सरबजीत सिंह बनाम पंजाब राज्य

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