Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

मध्यस्थता समझौते में हस्तलिखित क्लॉज की प्रै‌क्टिस को तब तक बंद करने की आवश्यकता है, जब तक कि मध्यस्थ, पक्ष प्रतिहस्ताक्षर न करें: दिल्ली हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
10 Nov 2021 10:08 AM GMT
मध्यस्थता समझौते में हस्तलिखित क्लॉज की प्रै‌क्टिस को तब तक बंद करने की आवश्यकता है, जब तक कि मध्यस्थ, पक्ष प्रतिहस्ताक्षर न करें: दिल्ली हाईकोर्ट
x

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मध्यस्थता समझौते में हस्तलिखित क्लॉज की प्रैक्टिस को तत्काल बंद करने की आवश्यकता है, जब तक कि मध्यस्थ या परामर्शदाता के साथ-साथ पक्षों ने अपनी उपस्थिति में प्रतिहस्ताक्षरित या आद्याक्षर न किया हो।

जस्टिस नजमी वज़ीरी ने कहा,

"अक्सर जब एक समझौता दर्ज किया जाता है, तो यह पार्टियों के बीच बहुत सारी बातचीत के बाद होता है, जिन्होंने हमेशा लंबे मुकदमों, उत्पीड़न और बहुत पीड़ा का सामना किया होता है। वे मध्यस्थता समझौते की रिकॉर्डिंग के बेहतर बिंदुओं को नहीं जान सकते हैं; इसलिए, यह सुनिश्चित करना मध्यस्थ/परामर्शदाता कर्तव्य बन जाता है कि निपटान समझौता विशेष रूप से रजत गुप्ता (सुप्रा) में इस अदालत के आदेश के अनुसार दर्ज किया गया है।"

रजत गुप्ता के मामले में मध्यस्थों से अनुरोध किया गया था कि वे मध्यस्थता या निपटान समझौतों में किसी भी हस्तलिखित नोटेशन या शब्दों की अनुमति न दें, खासकर यदि वे स्वयं मध्यस्थ द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित या आद्याक्षर नहीं है।

जस्टिस वज़ीरी का विचार इस प्रकार था, "विद्वान परिवार न्यायालय भी यह सुनिश्चित करेगा कि जब भी एक निपटान समझौता दर्ज किया जाता है, तो यह पूर्वोक्त हुक्म के अनुसार हो। चूक के मामलों में विसंगति को ठीक करने के लिए समझौते को मध्यस्थता केंद्र में वापस भेजा जा सकता है। विद्वान परिवार न्यायालय सुनिश्चित करें कि पक्षकारों के समझौते/उपक्रम की रिकॉर्डिंग रजत गुप्ता (सुप्रा) के संदर्भ में हो।"

प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय द्वारा पारित आदेश की जानबूझकर अवज्ञा के लिए प्रतिवादी पत्नी के खिलाफ पति द्वारा दायर एक अवमानना ​​​​याचिका में यह मामला सामने आया था, जिसमें पत्नी के वकील का बयान यह कहते हुए दर्ज किया गया था कि वह याचिका को आगे बढ़ाने की इच्छा नहीं रखती है, क्योंकि निपटान समझौते के संदर्भ में पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा किया गया था। इस हिसाब से दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से अपनी शादी को भंग करने पर सहमति जताई थी।

एमिकस क्यूरी ने प्रस्तुत किया कि मामले में रजत गुप्ता मामले में खंडपीठ द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के आवश्यक तत्वों में से किसी का भी पालन नहीं किया गया था।

अदालत ने शुरुआत कहा, "अदालत ध्यान देगी कि मध्यस्थता समझौते में हस्तलिखित क्लॉज हैं जो क्रमानुसार नहीं हैं। उन पर प्रत्येक स्थान पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं जहां क्लॉज डाले गए हैं। किसी भी संदेह को दूर करने के लिए, ऐसे प्रत्येक हस्तलिखित क्लॉज को सभी पक्षों द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं किया जा रहा है, यह उन पक्षों के बारे में संदेह पैदा करता है जो उक्त क्लॉज के समर्थक हैं।"

अदालत ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि चूंकि निपटान समझौता खंडपीठ के फैसले के संदर्भ में नहीं था और न ही पत्नी के किसी भी अंडरटेकिंग को फैमिली कोर्ट के समक्ष दर्ज किया गया था और बिना हलफनामे के समझौते की शर्तों की पुष्टि की गई थी, उक्त समझौता कोर्ट के आदेश का हिस्सा नहीं है।

कोर्ट ने कहा, "तदनुसार, यह कहा नहीं जा सकता है प्रतिवादी ने अदालत की अवमानना कीहै। कोई अवमानना नहीं की गई है।"

तद्नुसार याचिका का निस्तारण किया गया।

शीर्षक: महेंद्र सिंह बनाम मीनाक्षी यादव

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Next Story