पंजाब सीएम भगवंत मान और मंत्रियों को अयोग्य ठहराने की मांग, हाईकोर्ट ने खारिज की PIL

Shahadat

12 May 2026 6:22 PM IST

  • पंजाब सीएम भगवंत मान और मंत्रियों को अयोग्य ठहराने की मांग, हाईकोर्ट ने खारिज की PIL

    पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य मंत्रियों को अयोग्य ठहराने की मांग वाली PIL खारिज की। कोर्ट ने कहा कि 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट तभी स्वीकार्य होती है, जब किसी व्यक्ति में सार्वजनिक पद धारण करने की पात्रता का स्पष्ट अभाव हो।

    चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी ने कहा,

    "हमने पूरी याचिका को पढ़ा है, लेकिन प्रतिवादी नंबर 3 से 18 पर भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोप लगाने के अलावा, हमें उनके पद पर बने रहने के लिए ज़रूरी योग्यताओं में किसी भी कमी के बारे में नहीं बताया गया। प्रतिवादी नंबर 3 (सीएम भगवंत मान) से 18 (अन्य मंत्री) के पास जो पद हैं, उनके लिए ज़रूरी योग्यताएं पूरी हैं... हमने अपने एक पिछले फैसले में भी यही बात कही थी, जिसमें हरियाणा और पंजाब राज्यों के एडवोकेट जनरल के पद के लिए इसी तरह की 'क्वो वारंटो' (Quo Warranto) रिट की मांग की गई थी।

    उस मामले (CWP-PIL-141-2025), जिसका शीर्षक 'प्रदीप सिंह एडवोकेट बनाम हरियाणा राज्य और अन्य' था, में हमने यह फैसला दिया कि किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति पर अयोग्यता, भ्रष्टाचार या कदाचार का आरोप लगाकर 'क्वो वारंटो' रिट की मांग नहीं की जा सकती, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि उस सार्वजनिक पद के लिए ज़रूरी योग्यताएं उस व्यक्ति में मौजूद नहीं हैं।"

    याचिकाकर्ता खुद अदालत में पेश हुए। उन्होंने इस आधार पर 'क्वो वारंटो' रिट की मांग की थी कि प्रतिवादी "संविधान की भावना और मूल सिद्धांतों" के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने पंजाब विधानसभा के स्पीकर को यह निर्देश देने की भी मांग की कि वे प्रतिवादियों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करें, उन्हें मिलने वाले वित्तीय लाभों के वितरण पर रोक लगाएं और जांच के बाद कुछ खर्चों की वसूली का आदेश दें।

    शुरुआत में ही, अदालत ने 'क्वो वारंटो' रिट के सीमित दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसी रिट केवल तभी जारी की जा सकती है, जब किसी सार्वजनिक पद पर बैठा व्यक्ति संवैधानिक या कानूनी प्रावधानों के तहत अयोग्य पाया जाए, या उस पद के लिए ज़रूरी योग्यताओं की उसमें कमी हो।

    याचिका की जांच करने पर पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने मुख्य रूप से प्रतिवादियों पर भ्रष्टाचार, कदाचार और गलत आचरण के आरोप लगाए, लेकिन वे संबंधित पदों पर बने रहने के लिए उनकी योग्यता या पात्रता में किसी भी कमी को बताने में असफल रहे।

    अदालत ने अपने पिछले फैसले 'प्रदीप सिंह एडवोकेट बनाम हरियाणा राज्य और अन्य' (CWP-PIL-141-2025) का हवाला दिया, जिसमें उसने यह फैसला दिया कि अनुचित आचरण या कदाचार के आरोप 'क्वो वारंटो' कार्यवाही के दायरे से बाहर होते हैं; यह कार्यवाही सख्ती से केवल पात्रता मानदंडों की जांच तक ही सीमित होती है।

    उपरोक्त स्थिति को दोहराते हुए पीठ ने फैसला दिया कि भ्रष्टाचार या अयोग्यता के दावों पर 'क्वो वारंटो' याचिका में तब तक सुनवाई नहीं की जा सकती, जब तक कि वे सीधे तौर पर कानूनी या संवैधानिक अयोग्यता।

    याचिका में कोई सार न पाते हुए न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि इसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं बनता और याचिका खारिज की।

    याचिकाकर्ता स्वयं उपस्थित हुए।

    Title: Jagmohan Singh Bhatti Advocate

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