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एनडीपीएस अधिनियम - एक पार्टी में दूसरे के लिए ड्रग्स खरीदना किसी को ड्रग पेडलर नहीं बनाता है: बॉम्बे हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
27 Aug 2021 4:40 AM GMT
एनडीपीएस अधिनियम - एक पार्टी में दूसरे के लिए ड्रग्स खरीदना किसी को ड्रग पेडलर नहीं बनाता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
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कोर्ट ने पहली बार अपराध करने वाले दो अपराधियों के लिए एक सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया और टिप्पणी की कि आज के युवा "अभी या कभी नहीं" के रवैये से अपने कार्यों के परिणामों का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्रग्स रखने और सेवन करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दो युवकों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि किसी पार्टी में किसी अन्य व्यक्ति के लिए ड्रग्स खरीदने के कारण उसे ड्रग पेडलर नहीं बनाया जाएगा और उसकी जमानत के खिलाफ प्रथम दृष्टया एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरता लागू नहीं होगी।

न्यायमूर्ति भारती डांगरे ने पहली बार अपराध करने वाले दो अपराधियों के लिए सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया और टिप्पणी की कि आज के युवा "अभी या कभी नहीं" रवैये से अपने कार्यों के परिणामों का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं।

जून 2021 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट (एनडीपीएस) की धारा 20, 21, 25 के तहत गिरफ्तार किए गए दो याचिकाकर्ताओं ने इस आधार पर जमानत मांगी कि न तो ड्रग्स की व्यावसायिक मात्रा जब्त की गई थी, न ही धारा 42 और 50 के तहत तलाशी के लिए अनिवार्य प्रावधानों का पालन किया गया था, और यह कि दो महीने जेल में बिताने के बाद युवकों को सबक मिल गया था।

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि प्रथम याचिकाकर्ता ने महाराष्ट्र के इगतपुरी में 27 लोगों की उपस्थिति में जन्मदिन की पार्टी का आयोजन किया था, और दूसरा याचिकाकर्ता के पास से 5.72 ग्राम कोकीन पाया गया था और वह ड्रग माफिया के संपर्क में था।

अभियोजन पक्ष ने कहा,

"स्विमिंग पूल में कोकीन के निशान भी पाए गए थे, और अगर एक लीटर कोकीन की मात्रा (एक बार एफएसएल रिपोर्ट आती है) को स्विमिंग पूल में पानी की आनुपातिक मात्रा (लगभग 50 हजार लीटर) में मिलाया गया था, और इस प्रकार यह एक वाणिज्यिक मात्रा बन जाएगी। इसलिए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 की कठोरता लागू होगी।"

हालांकि, न्यायमूर्ति डांगरे ने कहा कि प्रथम दृष्टया, नाइजीरियाई नागरिक के साथ दूसरी याचिकाकर्ता की कॉल, पार्टी में नशीली दवाओं की खपत के लिए प्रतीत होती है, और उन्हें कल्पना के किसी भी हिस्से से 'ड्रग पेडलर' नहीं कहा जा सकता है।

न्यायाधीश ने कहा,

"इस स्तर पर, यह इंगित करने के लिए कोई तथ्य उपलब्ध नहीं है कि ऑपरेशन एक अपराध सिंडिकेट का एक हिस्सा था, जहां ड्रग्स की खरीद-बिक्री की जाती है और आवेदक - हर्ष, जिसने मादक पदार्थ लाया था और इसे अन्य आरोपियों को पेश किया था, को किसी भी काल्पनिक दृष्टि से एक ड्रग पेडलर की भूमिका में नहीं बताया जा सकता।"

कोर्ट ने महसूस किया कि दोनों आरोपी एक पूर्व चेतावनी के साथ सुधार का मौका पाने के हकदार थे कि यदि वे अपने कार्यों को दोहराते हैं या मुकदमे के दौरान दोषी पाए जाते हैं तो कानून उन्हें नहीं बख्शेगा।

न्यायमूर्ति डांगरे ने स्विमिंग पूल में प्रतिबंधित मादक पदार्थ के मामले में अभियोजन पक्ष की दलीलों को 'अजीब' और 'विचित्र' करार दिया।

"एनडीपीएस अधिनियम उन लोगों के लिए निवारक सजा का प्रावधान करता है, जो बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों को लाते ले जाते हैं और इसके सेवन के आदी होते हैं। याचिकाकर्ताओं के किसी ड्रग्स के इस्तेमाल या उपभोग में पहले शामिल रहने का पूर्व में कोई रिकॉर्ड नहीं रहा है.. उनकी उम्र, जहां वे सुधार के चरण में हैं, उस पर विचार करते हुए उन्हें पूर्व चेतावनी के साथ आजादी बहाल किये जाने के पात्र हैं।"

न्यायमूर्ति डांगरे ने जोर देकर कहा कि आज के युवा "अभी या कभी नहीं" के रवैये से अपने कार्यों के परिणामों का अंदाजा नहीं लगा सकते।

"किशोरावस्था और युवावस्था जीवन के ऐसे चरण हैं, जहां कुछ लोगों द्वारा तर्कहीन और आवेगपूर्ण निर्णय लेने का पक्ष लिया जा सकता है। आज की चुनौती मुख्य रूप से युवाओं में मादक पदार्थों की लत के मुद्दे और इससे निपटने के तरीके पर केंद्रित है। शराब और नशीली दवाओं के साथ प्रयोग आम है। दुर्भाग्य से, युवा अपनी आज के कदम और कल के परिणामों के बीच संबंध नहीं देखते हैं।"

अदालत ने आगे कहा कि नशीले पदार्थों का खतरा एक वास्तविकता है जिसके लिए इस मुद्दे की जड़ तक पहुंचने के लिए गंभीर सवाल खड़े करने होंगे।

"यह वास्तव में एक कड़वी सच्चाई है।"

केस शीर्षक: [हर्ष शैलेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य]

वकील: सीनियर एडवोकेट आबाद पोंडा, एडवोकेट कुशाल मोर, ऋषि बुट्टा, अनुराग गर्ग, आशीष दुबे

सरकार की ओर से- एपीपी एआर कपडनीस

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