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त्रिपुरा हाईकोर्ट ने मवेशी ले जाने के संदेह में भीड़ में शामिल 18 साल के युवक को बेरहमी से पीट-पीट कर मार डालने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया

LiveLaw News Network
13 Oct 2021 9:23 AM GMT
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने मवेशी ले जाने के संदेह में भीड़ में शामिल 18 साल के युवक को बेरहमी से पीट-पीट कर मार डालने के आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार किया
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त्रिपुरा हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। यह व्यक्ति कथित तौर पर उस भीड़ का हिस्सा था जिसने पशु चोरों की टीम का हिस्सा होने के संदेह में 18 वर्षीय लड़के सैफुल इस्लाम की बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

न्यायमूर्ति एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने यह कहते हुए कि 18 साल के एक युवा लड़के को केवल इस संदेह पर भीड़ द्वारा बेरहमी से पीटा गया था कि वह एक मवेशी ले जा रहा था, भले ही उसके पास कोई मवेशी नहीं मिला, आरोपी गगन देबबर्मा को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

संक्षेप में तथ्य

मुंगियाकामी पुलिस स्टेशन, खोवाई के प्रभारी अधिकारी के अनुसार, 20 जून, 2021 को उन्हें पता चला कि मृतक (सैफुल इस्लाम) ने अपने सहयोगियों के साथ मवेशियों को चुरा लिया था और जब वे चोरी किए गए मवेशियों को वाहन में ले जा रहे थे, तो वे थे स्थानीय लोगों द्वारा पकड़ लिए गए।

जब शिकायतकर्ता मौके पर पहुंचा तो उसने देखा कि मृतक के शरीर पर जख्मों घाव के कई निशान थे और वह सड़क पर पड़ा हुआ थे। वह इस कदर जख्मी था कि कुछ भी नहीं बोल पा रहा था।

जब मृतक सैफुल इस्लम भागने की कोशिश कर रहा था, तो उसे सोवरम चाउ पारा में पकड़ लिया गया था और एक उत्तेजित भीड़ ने उसे बेरहमी से पीटा। इससे उसके घाव और गहरे हो गए और उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया।

जांच के दौरान, पुलिस ने कुछ गवाहों के बयान दर्ज किए। इसमें जमानत आवेदक उस भीड़ का हिस्सा पाया गया जिसने कथित तौर पर मृतक की हत्या की थी। इस प्रकार, उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 341 और 302 r/w के तहत मामला दर्ज किया गया।

वर्तमान जमानत याचिका दायर करते हुए जमानत आवेदक द्वारा यह तर्क दिया कि एफआईआर में उसका नाम आरोपी के रूप में नहीं था, इसलिए उसके खिलाफ हत्या के आरोप का कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता था। उसके वकील द्वारा यह तर्क दिया गया कि उसकी गिरफ्तारी और नजरबंदी का कोई न्यायोचित कारण नहीं है।

दूसरी ओर, पी.पी. राज्य के लिए तर्क दिया कि मृतक की एक भीड़ द्वारा बेरहमी से हत्या कर दी गई और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से आरोपी याचिकाकर्ता का नाम भीड़ के सदस्यों में से एक के रूप में सामने आया है जो मृतक का पीछा करते हुए और उसे मारते हुए पाए गए थे।

कोर्ट का आदेश

अदालत ने कहा,

"पुलिस के द्वारा की गई जांच के दौरान कुछ चश्मदीद गवाहों के बयान यह दर्शाते हैं कि वर्तमान आवेदक भीड़ के सदस्यों में से एक था, जो मृतक का पीछा करते और पीटते हुए पाया गया था।"

इसलिए, अपराध की गंभीरता और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मृतक को केवल इस संदेह पर भीड़ द्वारा बेरहमी से पीटा गया था कि वह एक मवेशी ले जा रहा था, भले ही उसके कब्जे में कोई मवेशी नहीं मिला, अदालत ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया।

केस शीर्षक - गगन देबबर्मा बनाम त्रिपुरा राज्य

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