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केरल हाईकोर्ट ने विदेश में रहने वाले कपल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विवाह के रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी

LiveLaw News Network
14 Jun 2021 7:00 AM GMT
केरल हाईकोर्ट ने विदेश में रहने वाले कपल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विवाह के रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी
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केरल हाईकोर्ट ने महामारी की वजह से देश में लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों के कारण ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एक कपल को केरल विवाह पंजीकरण (सामान्य) नियम, 2008 के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी शादी को पंजीकृत करवाने की अनुमति दी है।

याचिकाकर्ता थॉमस कुट्टी जोसेफ और ब्लॉसम थॉमस को विवाह के स्थानीय रजिस्ट्रार ने सूचित किया था कि ज्ञापन पर आगे की कार्यवाही करने के लिए उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता है। जिसके बाद उन्होंने अपने पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से हाईकोर्ट का रुख किया।

एडवोकेट जैकब पी. एलेक्स ने याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए, बेंच के सामने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ताओं का विवाह 30.06.1997 को हुआ था और उनके पास इस विवाह का प्रमाण पत्र भी है। इतना ही नहीं उनके तीन बच्चे भी हैं।

याचिका में कहा गया है कि वे हाल ही में एक अस्थायी वीजा पर संयुक्त अरब अमीरात से ऑस्ट्रेलिया चले गए हैं। अप्रवासन के नियमों में बदलाव के कारण, उन्हें स्थायी स्टे्टस पाने के लिए अपने आवेदन को प्रोसेस करने के लिए अपना विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।

कोर्ट ने कहा कि कई निर्णयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शादी के रजिस्ट्रेशन को सही ठहराया गया है। यह भी निर्विवाद था कि प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार याचिकाकर्ता पति-पत्नी हैं।

इसके अलावा, स्थानीय रजिस्ट्रार केवल सक्षम प्राधिकारी को ज्ञापन प्रेषित करने के लिए बाध्य था। विवाह का पंजीकरण विवाह के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा किया जाना है।

यह देखते हुए कि रजिस्टरों में अपने हस्ताक्षर करने के लिए याचिकाकर्ताओं का इस कठिन समय में ऑस्ट्रेलिया से भारत की यात्रा करना व्यावहारिक रूप से असंभव है, न्यायमूर्ति सी.एस. डायस ने कहा किः

''इस असाधारण स्थिति में प्रक्रिया को सख्त रूप से लागू करने पर जोर नहीं दिया जा सकता है। मामले के अजीबोगरीब तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मेरा विचार है कि याचिकाकर्ताओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी शादी को पंजीकृत करवाने और उनका प्रतिनिधित्व पावर ऑफ अटॉर्नी द्वारा किए जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। यदि आवश्यक हो तो आवेदनों व अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर लेने के लिए उनके डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग कर लिया जाए, जो वैधानिक आवश्यकताओं को पूरा कर देगा।''

निम्नलिखित निर्देशों के साथ रिट याचिका को अनुमति दे दी गई हैः

-लोकल रजिस्ट्रार याचिकाकर्ताओं के विवाह के पंजीकरण के लिए सक्षम प्राधिकारी को ज्ञापन प्रेषित करेगा।

-याचिकाकर्ताओं का पावर ऑफ अटॉर्नी पीओए की एक प्रति प्रस्तुत करेगा और यह कहते हुए एक हलफनामा दाखिल करेगा कि वह याचिकाकर्ताओं के सभी अन्य आवेदनों और दस्तावेजों के साथ विवाह रजिस्टर में हस्ताक्षर करने के लिए विधिवत रूप से अधिकृत है।

-ज्ञापन प्राप्त होने के बाद विवाह का रजिस्ट्रार जनरल पीओए धारक को नियमों के तहत आने वाले सभी प्रासंगिक रजिस्टरों, आवेदनों और दस्तावेजों में याचिकाकर्ताओं के लिए और उनकी ओर से हस्ताक्षर करने की अनुमति देगा।

-विवाह का रजिस्ट्रार जनरल, यदि आवश्यक हो, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से याचिकाकर्ताओं के साथ बातचीत करे या ई-मेल/कूरियर से भेजी गई एक हार्ड काॅपी के जरिए याचिकाकर्ताओं से उनके डिजिटल हस्ताक्षर के साथ एक अंडरटेकिंग मंगवा ले।

-एक बार याचिकाकर्ताओं और उनके पीओए की पहचान के बारे में आश्वस्त होने के बाद, विवाह का रजिस्ट्रार जनरल याचिकाकर्ताओं के विवाह को पंजीकृत करें और उसके बाद, याचिकाकर्ताओं के पीओए धारक को यथासंभव शीघ्रता से विवाह प्रमाणपत्र जारी कर दें।

पीओए धारक को उचित अनुपालन के लिए प्रतिवादियों के समक्ष इस निर्णय की एक प्रति प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी गई है।

केस का शीर्षकः थॉमस कुट्टी जोसेफ बनाम विवाह का स्थानीय रजिस्ट्रार

आदेश डाउनलोड/पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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