कथित तौर पर ईरानी वॉरशिप की फ़िल्मिंग के आरोप में गिरफ़्तार Republic TV के पत्रकारों को मिली ज़मानत
Shahadat
10 March 2026 6:36 PM IST

कोच्चि की ज्यूडिशियल फ़र्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट कोर्ट - 1 ने मंगलवार (10 मार्च) को Republic TV के पत्रकार शंकर सी.जी. और कैमरामैन मणि एस. को ज़मानत दी। इन दोनों को शनिवार को कोचीन बंदरगाह के एक प्रतिबंधित क्षेत्र में कथित तौर पर एक ईरानी युद्धपोत की फ़िल्म बनाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।
मजिस्ट्रेट श्री कन्नन एल. ने एक साझा आदेश पारित करते हुए पत्रकारों और उन्हें ले जाने वाली नाव के चालक को ज़मानत दी।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि हालांकि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, लेकिन जांच काफ़ी आगे बढ़ चुकी है। यह भी नोट किया गया कि अपराध करने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए डिवाइस गिरफ़्तारी के समय ही ज़ब्त कर लिए गए और घटनास्थल का पंचनामा (महज़र) भी तैयार कर लिया गया था। इसके अलावा, यह राय व्यक्त की गई कि ज़मानत दी जा सकती है, क्योंकि याचिकाकर्ताओं का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उनके फ़रार होने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है, जो कि कोस्ट गार्ड के सदस्य हैं।
मजिस्ट्रेट ने टिप्पणी की,
"आरोपों की प्रकृति को देखते हुए जांच का एक बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि याचिकाकर्ताओं का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। याचिकाकर्ता पत्रकार और एक स्पीडबोट चालक हैं। इन पहलुओं को देखते हुए उनके फ़रार होने की संभावना बहुत कम है। इसके अलावा, मुख्य गवाह कोस्ट गार्ड के सदस्य हैं, इसलिए याचिकाकर्ताओं द्वारा उन्हें प्रभावित करने या धमकाने की संभावना भी बहुत कम है। अभियोजन पक्ष द्वारा उठाई गई आशंकाओं का समाधान कड़ी शर्तें लगाकर किया जा सकता है। मेरा विचार है कि याचिकाकर्ताओं को कड़ी शर्तें लगाकर ज़मानत दी जा सकती है।"
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने कोचीन बंदरगाह के दक्षिणी कोयला बर्थ (SCB) के उच्च सुरक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया और एक ईरानी जहाज़ की तस्वीरें और वीडियो बनाए, जिसे कथित तौर पर सुरक्षा कारणों से वहां खड़ा किया गया। आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि ये कृत्य राष्ट्र की सुरक्षा को खतरे में डालने के इरादे से किए गए।
आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि कथित घटना से पहले ही सभी समाचार चैनलों पर कोचीन बंदरगाह पर एक ईरानी युद्धपोत के खड़े होने की ख़बर प्रसारित हो चुकी थी। आगे यह भी तर्क दिया गया कि वर्तमान मामले में कथित अपराधों के आरोप लागू नहीं होते हैं। उन पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 329(3) [आपराधिक अतिचार और गृह-अतिचार] और 3(5) [साझा इरादे को आगे बढ़ाने के लिए किए गए आपराधिक कृत्य] तथा शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 की धारा 3(1)(a) [जासूसी के लिए दंड] और 5 [सूचना का गलत संचार, आदि] के तहत दंडनीय अपराधों का आरोप है।
रिपब्लिक टीवी के पत्रकार और कैमरामैन का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता ल्यूक जे. चिरायिल ने किया। अभियुक्तों की ओर से पेश होने वाले अन्य अधिवक्ताओं में जियो पॉल, ज़ैनुद्दीन पी., ए.आर. तेजस कृष्णा, नेहा रामकृष्णन और जैकब विक्टर शामिल हैं।
Case Title: Sankar C.G. and Anr. v. State of Keral and Anr.

