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किशोर न्याय अधिनियम: दिल्ली हाईकोर्ट ने 'कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों' की 'आयु निर्धारण' को पूरा करने के लिए समय-सीमा जारी की

LiveLaw News Network
6 Nov 2021 8:54 AM GMT
किशोर न्याय अधिनियम: दिल्ली हाईकोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों की आयु निर्धारण को पूरा करने के लिए समय-सीमा जारी की
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों से संबंधित पूछताछ की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और सभी अधिकारियों द्वारा ईमानदारी से अनुपालन करने के निर्देश जारी किए हैं।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जे भंभानी की पीठ ने निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए हैं-

(ए) कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों से संबंधित सभी मामलों में कथित अपराधों की प्रकृति की परवाह किए बिना, एक किशोर को जेजेबी के समक्ष पेश करने के बाद उसकी ओर से दिए गए निर्देशों पर मामले का जांच अधिकारी, ऐसे निर्देश जारी होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर किशोर की आयु के प्रमाण के लिए दस्तावेज जेजेबी के पास जमा करेगा।

(बी) कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों से संबंधित सभी मामलों में, कथित अपराधों की प्रकृति की परवाह किए बिना, एक किशोर को उसके समक्ष पेश करने के बाद जेजेबी द्वारा जारी निर्देशों पर मामले का जांच अधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि जिस तारीख को जेजेबी ने ऑसिफिकेशन टेस्ट का आदेश दिया है उस तारीख से 15 दिनों के भीतर किशोर के संबंध में ऑसिफिकेशन टेस्ट को पूरा किया जाए, एक रिपोर्ट प्राप्त की जाए और जेजेबी के समक्ष जेजेबी के समक्ष दायर की जाए।

(सी) कानून का उल्लंघन करने वाले किशोरों से संबंधित सभी मामलों में, कथित अपराधों की प्रकृति की परवाह किए बिना, जेजेबी यह सुनिश्चित करेगा कि किशोर के आयु-निर्धारण की प्रक्रिया को जांच अधिकारी द्वारा आयु संबंधित दस्तावेज/ऑसिफिकेशन रिपोर्ट रिपोर्ट, जैसा भी मामला हो, दाखिल करने के 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाए।

(डी) सभी व्यक्तियों/शैक्षणिक संस्थानों/चिकित्सा संस्थानों/सरकारी प्राधिकरणों, जिन्हें जांच अधिकारी द्वारा आयु-निर्धारण के लिए दस्तावेज उपलब्ध कराने या किसी किशोर का ऑसिफिकेशन टेस्ट करने के लिए अनुरोध किया जाता है, उन्हें यह निर्देश दिया जाता है कि उक्त अनुरोध को को प्राथमिकता दी जाएगी...।

न्यायालय ने ये निर्देश एक आपराधिक संदर्भ के निस्तारण के दरमियान जारी किए, जिसमें किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट ने उन परिस्थितियों से संबंधित कानून के प्रश्न उठाए थे, जब कानून का उल्लंघन करने वाला बच्चा, ऐसा बच्‍चा होता है, जिसे देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता होती है।

अदालत ने दिल्ली सरकार को छह महीने से एक साल के बीच दिल्ली स्थित सभी जेजेबी के समक्ष लंबित मामूली अपराधों के लिए पूछताछ से संबंधित जानकारी प्रस्तुत करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया, जिसमें ऐसे मामलों की संख्या के साथ-साथ जांच की स्थापना की तारीख, कानून का उल्लंघन करने वाले किशोर को पहली बार पेश करने की तारीख भी शामिल है।

पिछले महीने, कोर्ट ने निर्देश दिया था कि कानून के उल्लंघन में बच्चों या किशोरों के खिलाफ छोटे-मोटे अपराधों का आरोप लगाने वाले सभी मामले, जहां जांच लंबित है और मामला एक वर्ष से अधिक समय तक अनिर्णायक रहता है, भले ही ऐसे बच्चे या किशोर को दिल्ली में किशोर न्याय बोर्ड पहले पेश किया गया हो या नहीं, तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाएंगे।

कोर्ट ने कहा कि महामारी के कारण मामले लंबे समय से लंबित थे, जहां बच्चों को जेजे बोर्ड के सामने पेश नहीं किया गया था। हितधारकों द्वारा यह समझा गया था कि धारा 14 में निर्धारित 4 महीने का समय जेजेबी के समक्ष बच्चे के पहली बार पेश करने की तारीख के बाद ही शुरू होगा। छोटे-मोटे अपराधों से संबंधित सैकड़ों मामले विभिन्न चरणों में 4 महीने से अधिक समय से लंबित हैं।

केस टाइटल: कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम स्टेट

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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