जज का काम किसी को खुश करना नहीं, बल्कि न्याय करने में ही असली संतुष्टि: जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को कहा अलविदा
Shahadat
23 Jun 2026 8:00 PM IST

बॉम्बे हाईकोर्ट से विदा लेते हुए जज जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने मंगलवार (23 जून) को कहा कि अपने काम से संतुष्टि पाने के लिए एक जज को अपनी पूरी क्षमता से काम करना चाहिए, न कि किसी को खुश करने या संतुष्ट करने की कोशिश करनी चाहिए।
जस्टिस कंकनवाड़ी को 9 साल पहले हाईकोर्ट में प्रमोट किया गया था। वह कुल 34 साल तक जज रहने के बाद रिटायर हुईं।
हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच की अध्यक्षता करने वाली पहली महिला जज रहीं जस्टिस कंकनवाड़ी ने अपने विदाई भाषण में कहा कि न्याय करना, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना और न्यायिक प्रणाली में जनता का भरोसा बनाए रखना एक जज का अहम कर्तव्य है।
जस्टिस कंकनवाड़ी ने कहा,
"काम से संतुष्टि तब मिलती है या महसूस होती है, जब आप अपनी पूरी क्षमता से काम करते हैं। लेकिन यह ऐसा काम नहीं है जिसे दूसरों को संतुष्ट करने या किसी को खुश करने के लिए किया जा सके।"
इसके अलावा, जज ने बताया कि जनता केवल कोर्ट रूम में जज को फैसले और आदेश सुनाते हुए देखती है, लेकिन कोर्ट रूम के बाहर जज की कोशिशें जनता को दिखाई नहीं देतीं।
रिटायर हो रहीं जज ने कहा,
"जनता अक्सर केवल कोर्ट रूम की कार्यवाही और फैसले सुनाए जाने को देखती है, जबकि एक जज का जीवन कोर्ट रूम से कहीं आगे तक फैला होता है और इसमें समर्पण, त्याग, ईमानदारी और लगातार सीखते रहने की भावना होती है। ज़्यादातर जजों का सफर 'बार' (वकीलों के संगठन) से शुरू होता है। न्यायिक पद संभालने से पहले वे वकील के तौर पर कई साल बिताते हैं, कानून सीखते हैं, मुकदमेबाजी की बारीकियों को समझते हैं और न्याय करने के लिए ज़रूरी कौशल विकसित करते हैं। कोर्ट रूम उनके क्लासरूम बन जाते हैं और 'बार' वह संस्थान है, जहां न्यायिक चरित्र की नींव रखी जाती है।"
अपने संबोधन में जज ने कहा कि 'बार' जिस तरह से एक जज को तैयार करता है, उसका एक अहम तरीका वकालत है, क्योंकि जज तथ्यों को पेश करने के लिए वकीलों पर निर्भर होते हैं।
जज ने कहा,
"कानूनी सिद्धांत और पहले के न्यायिक फैसले, अच्छी तरह से रिसर्च की गई दलीलें, संतुलित बातें और पेशेवर मदद जजों को जटिल कानूनी मुद्दों को समझने और सही नतीजे पर पहुंचने में मदद करती हैं। न्यायिक फैसलों की गुणवत्ता अक्सर 'बार' से मिलने वाली मदद की गुणवत्ता से प्रभावित होती है। यह मुकदमों से जुड़े लोगों, गवाहों और कानूनी संस्थानों के साथ रोज़ाना बातचीत के ज़रिए जजों के लिए व्यावहारिक समझ का स्रोत भी बनता है।"
जज ने बताया कि वकीलों को इंसानी व्यवहार और सामाजिक सच्चाइयों के बारे में अहम जानकारी मिलती है। ये अनुभव भविष्य के जजों में सहानुभूति, संतुलन और समाज पर अदालती फैसलों के असर की गहरी समझ विकसित करने में मदद करते हैं।
जज ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा,
"जज के तौर पर न्यायपालिका के ऊंचे मानकों को बनाए रखना हमारी ज़िम्मेदारी है। इसके लिए समर्पण और निष्ठा की ज़रूरत होती है।"

