Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

'नशीली दवाओं के सेवन से आर्थिक समस्याएं पैदा हो रहीं और सामाजिक विघटन तक हो रहे': दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेपाली नागरिक को जमानत देने से इनकार किया

LiveLaw News Network
18 Aug 2021 9:50 AM GMT
नशीली दवाओं के सेवन से आर्थिक समस्याएं पैदा हो रहीं और सामाजिक विघटन तक हो रहे: दिल्ली उच्च न्यायालय ने नेपाली नागरिक को जमानत देने से इनकार किया
x

यह देखते हुए कि मादक द्रव्यों के सेवन के खतरे के परिणाम आर्थिक मुद्दों से लेकर सामाजिक विघटन तक अनुभव किए जा सकते हैं, दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को नशीले पदार्थों के कारोबार के आरोपी नेपाल के एक नागरिक को जमानत देने से इनकार कर दिया।

जस्टिस सुब्रमनियम प्रसाद ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज याचिकाकर्ता को दो मामलों में जमानत देने से इनकार कर दिया- (i) वह ड्रग्स का आपूर्तिकर्ता है, और इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि अगर जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह फिर से ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होगा; और (ii) नेपाल का नागरिक होने के नाते समाज में उसकी जड़े नहीं हैं और इसे संभावित फ्लाइट र‌िस्‍क माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय को एनडीपीएस एक्ट के तहत जमानत देने के मामले पर विचार करते समय अधिनियम के उद्देश्य यानी मादक द्रव्यों के सेवन के खतरे को रोकना, को ध्यान में रखना होगा।

कोर्ट ने कहा, "एक व्यक्ति और समाज पर दवाओं के हानिकारक प्रभावों पर व्यापक शोध किया गया है और यह सर्वविदित है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग का खतरा भी देश में बढ़ रहा है और इसके परिणाम आर्थिक कारणों से सामाजिक विघटन के मुद्दे तक अनुभव किए जा सकते हैं।"

पृष्ठभूमि

18 दिसंबर, 2020 को एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी कि एक नेपाली नागरिक ग्राहकों को डिलीवरी के उद्देश्य से कुछ नशीले पदार्थ ले जा सकता है। मौके पर पहुंची टीम ने आरोपी आरोपी को पकड़ लिया। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान, याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया कि वह अपने बैग में चरस ले जा रहा था और वह इसे अपने ग्राहकों को बेचता था।

इसलिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 की धारा 8, 20 (बी) और 29 के तहत अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था। याचिकाकर्ता 19 दिसंबर से हिरासत में था और उसकी जमानत याचिका को विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस, पटियाला हाउस कोर्ट ने इस साल मार्च में खारिज कर दिया था।

इसे देखते हुए उनके द्वारा नियमित जमानत की अर्जी हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी, याचिकाकर्ता ने अपने ग्राहक हरेश रावल के साथ समानता का अनुरोध किया। कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता पर यह भी आरोप है कि उसने एक अपराध किया है, जिसमें दस साल तक की कैद की सजा है। इसके अलावा, यहां मामला हरेश रावल के मामले से अलग है, जिसे 03.06.2021 के आदेश के तहत जमानत दी गई थी क्योंकि मौजूदा मामले आरोप फ्रेम होना अभी बाकी है और याचिकाकर्ता के जमानत से भागने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता क्योंकि वह भारत का निवासी नहीं है। "

तद्नुसार याचिका का निस्तारण किया गया।

शीर्षक: मदन लामा बनाम नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

Next Story