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"कर्मचारियों को वेतन से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21, 23, 300A का उल्लंघन": उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से परिवहन निगम के कर्मचारियों को वेतन देने को कहा

LiveLaw News Network
22 July 2021 8:28 AM GMT
कर्मचारियों को वेतन से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21, 23, 300A का उल्लंघन: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से परिवहन निगम के कर्मचारियों को वेतन देने को कहा
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार को राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों के वेतन के भुगतान के मुद्दे को हल करने के लिए जल्द से जल्द एक बैठक बुलाने के लिए कहा। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को वेतन से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 21, 23 और 300 ए के तहत उनके अधिकारों का उल्लंघन है।

मुख्य न्यायाधीश राघवेंद्र सिंह चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने कहा कि,

"इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि ये कर्मचारी निगम के उच्च पद से संबंधित नहीं हैं, केवल श्रमिक हैं, क्योंकि उनमें से अधिकतर ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य कर्मचारी शामिल हैं, यह आश्चर्यजनक है कि निगम और राज्य सरकार दोनों ने उन्हें ऐसी ही छोड़ दिया है। कहने की जरूरत नहीं है कि वेतन से वंचित करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21, 23 और 300-ए का उल्लंघन है। इस प्रकार न तो निगम और न ही राज्य सरकार को कर्मचारियों को वेतन से वंचित करने की अनुमति दी जा सकती है।"

पीठ ने कहा कि आने वाले महीनों से कर्मचारियों के वेतन में 50% की कटौती करने का राज्य का निर्णय संविधान के अनुच्छेद 23 का उल्लंघन है और एक अपराध के समान है।

खंडपीठ ने केंद्र से उत्तर प्रदेश राज्य और उत्तराखंड राज्य के बीच के मुद्दों को दो से तीन महीने की अवधि के भीतर हल करने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा ताकि पूर्व से बाद की राशि के भुगतान की सुविधा मिल सके।

अदालत ने कहा कि,

"उम्मीद है कि कैबिनेट की बैठक जल्द से जल्द बुलाई जाएगी ताकि निगम के सामने आ रहे वित्तीय संकट को हल किया जा सके। आखिरकार, उत्तराखंड राज्य या निगम द्वारा कर्मचारियों को ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता है।"

परिवहन सचिव द्वारा एक हलफनामा प्रस्तुत किया गया, जिसमें कहा गया कि निगम को 29 जून को 23 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिसके माध्यम से मार्च माह तक के संविदा कर्मचारियों सहित फरवरी माह के कर्मचारियों के वेतन का वितरण किया गया।

यह भी कहा गया कि मुख्यमंत्री ने राज्य आकस्मिकता निधि से परिवहन निगम को 34 करोड़ रुपये जारी करने की मंजूरी दे दी है।

सुनवाई की अगली तारीख पर मुख्य सचिव, वित्त सचिव, परिवहन सचिव और निगम के प्रबंध निदेशक को न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश देते हुए मामले को 4 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

अदालत ने पिछले महीने निर्देश दिया था कि इस वर्ष फरवरी और मार्च माह के कर्मचारियों के वेतन के भुगतान हेतु राज्य परिवहन निगम को तत्काल 23 करोड़ रुपये हस्तांतरित किये जाये।

केस का शीर्षक: रिट याचिका (पीआईएल) No. 82 Of 2019

आदेश की कॉपी यहां पढें:



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