अजमेरी गेट पर 'अवैध निर्माण' के खिलाफ जनहित याचिका खारिज, हाईकोर्ट ने 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया
Shahadat
22 Feb 2025 4:39 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के अजमेरी गेट के विनियमित क्षेत्र में कथित अवैध और अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त करने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज की।
चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता- मिर्जा औरंगजेब पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया, जिसे दिल्ली हाईकोर्ट कर्मचारी कल्याण कोष में जमा किया जाना है।
न्यायालय ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अंततः वास्तविक सार्वजनिक कारणों का समर्थन करने के न्यायालय के प्रयास में बाधा डालती हैं।
न्यायालय ने कहा,
"भारत में जनहित याचिकाओं के विकास से संबंधित न्यायशास्त्र मुख्य रूप से उन लोगों को आवाज देने और उन लोगों को न्याय तक पहुंच प्रदान करने से संबंधित है, जो किसी भी कारण से वंचित हैं, जैसे कि अशिक्षा, गरीबी या किसी अन्य बाधा के कारण।"
खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका जनहित में नहीं बल्कि कुछ व्यक्तिगत उद्देश्यों को पूरा करने के लिए दायर की गई और इसे कुछ व्यक्तियों के कहने पर दायर किया गया।
खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका जनहित की रक्षा या उसे पूरा करने के लिए नहीं बल्कि कुछ कथित अवैध निर्माणों के संबंध में व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने के लिए दायर की गई।
खंडपीठ ने कहा,
"मामले के तथ्य और परिस्थितियां हमें इस निष्कर्ष पर ले जाती हैं कि याचिकाकर्ता ने तत्काल याचिका दायर करते समय केवल अप्रत्यक्ष उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अपना नाम आगे बढ़ाया। इसलिए याचिका स्पष्ट रूप से बाहरी विचारों के लिए दायर की गई।"
केस टाइटल: मिस्टर मिर्ज़ा औरंगज़ेब बनाम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और अन्य

