Breaking | दिल्ली दंगों मामले में कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की

Shahadat

4 July 2026 4:44 PM IST

  • Breaking | दिल्ली दंगों मामले में कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की

    दिल्ली कोर्ट ने शनिवार को उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ियों को खारिज किया। ये अर्ज़ियां 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे एक बड़ी साज़िश के मामले में दायर की गई थीं, जो UAPA के तहत दर्ज किया गया था।

    कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने दोनों आरोपियों की ज़मानत अर्ज़ियों को खारिज कर दिया।

    इससे पहले आज, खालिद की ओर से पेश होते हुए सीनियर वकील त्रिदीप पेस ने उन घटनाओं का ज़िक्र किया जिनकी वजह से यह ज़मानत अर्ज़ी दायर करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खालिद को ज़मानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि उमर और शरजील एक साल तक ज़मानत के लिए अर्ज़ी नहीं दे सकते, लेकिन इस दौरान सुरक्षित गवाहों (प्रोटेक्टेड विटनेस) से पूछताछ की जानी चाहिए।

    उन्होंने तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को छह महीने की अंतरिम ज़मानत देने वाले सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी ज़िक्र किया, जिसमें UAPA के तहत ज़मानत पर फैसलों में 'संभावित टकराव' (जब ट्रायल में देरी हो) के मामले को बड़ी बेंच को भेजा गया था।

    पेस ने ज़ोर देकर कहा,

    "मैं लगातार हिरासत में हूं। जब मैंने SLP के लिए अर्ज़ी दी, तब भी मैं हिरासत में ही था। कानून में हालात बदले हैं, आपने वे आदेश देखे हैं। अगर मुझे मेरिट्स पर अपनी बात रखनी है, तो मैं तैयार हूं। लेकिन संक्षेप में बात यह है कि कोई रिकवरी नहीं हुई, कोई ऐसा बयान नहीं है, जिससे कोई नई बात पता चली हो, मैं वहां मौजूद नहीं था, मुझ पर हिंसा का कोई आरोप नहीं है, सिर्फ़ एक वीडियो है जो अमरावती का है और 17 दिन पुराना है। मेरा कहना है कि मैं ज़मानत का हकदार हूं।"

    शरजील इमाम की ओर से पेश होते हुए वकील तालिब मुस्तफ़ा ने दलील दी कि याचिकाकर्ता पहले ही काफी समय जेल में बिता चुका है और ट्रायल के जल्द खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि जब दूसरे आरोपियों को राहत दी गई है, तो वह फायदा शरजील को भी मिलना चाहिए।

    ज़मानत अर्ज़ियों का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष के वकील ने दलील दी,

    "दोनों आरोपियों की ज़मानत की अर्ज़ी पर विचार तभी किया जा सकता है, जब सुरक्षित गवाहों से पूछताछ हो जाए या आदेश के एक साल पूरे हो जाएं, उससे पहले नहीं। उन्होंने रिव्यू अर्ज़ी भी दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था।"

    बता दें, खालिद और शरजील ने सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश की समीक्षा के लिए अर्ज़ी दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था।

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