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"कुंभ मेले के आयोजन और परिणामस्वरूप हुई मौतों के बीच स्पष्ट सह-संबंध, तीर्थस्थलों पर भीड़ जुटने की अनुमति देकर COVID को फिर आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए: उत्तराखंड हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
25 Jun 2021 6:20 AM GMT
कुंभ मेले के आयोजन और परिणामस्वरूप हुई मौतों के बीच स्पष्ट सह-संबंध, तीर्थस्थलों पर भीड़ जुटने की अनुमति देकर COVID को फिर आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए: उत्तराखंड हाईकोर्ट
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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार को चार धाम यात्रा और धार्मिक स्थलों पर बड़ी संख्या में भीड़ जुटने की अनुमति देकर, COVID महामारी को ‌फिर से आमंत्रित नहीं करना चा‌हिए।

चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान और जस्टिस आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सरकार से कहा कि वह एक जुलाई, 2021 को चार धाम यात्रा शुरू करने के अपने फैसले की समीक्षा करे।

कोर्ट ने कहा, "शायद चार धाम यात्रा को स्थगित या रद्द करने की जरूरत है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पहले ही अमरनाथ यात्रा रद्द कर दी है।"

कोर्ट ने कहा कि उन्हें बखूबी पता है कि यात्रा रद्द होने से चार धाम के निवासियों को वित्तीय कठिनाइयों का कारण हो सकता है, हालांकि, उन्होंने आगे कहा, "लोगों के जीवन को बचाना अधिक महत्वपूर्ण है।"

कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सरकार व्यापारियों और पर्यटन उद्योग के लाभ के लिए "आर्थिक प्रोत्साहन योजनाओं" की घोषणा करने के लिए स्वतंत्र है, जो चार धाम आने वाले तीर्थयात्रियों पर निर्भर करता है।

कोर्ट ने लोगों की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखने के लिए देश के लोगों के लाभ के लिए चार धाम तीर्थस्थलों की लाइव स्ट्रीमिंग का विचार भी रखा।

अदालत ने कहा, "इस तरह की लाइव स्ट्रीमिंग भक्तों को देवता को देखने, देवता के प्रति श्रद्धा दिखाने और फिर लोगों की जान बचाने की अनुमति देगी।"

इसके साथ ही कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह चार धाम यात्रा के उद्घाटन के संबंध में कैबिनेट के निर्णय, यदि कोई हो, के संबंध में 28 जून, 2021 को न्यायालय को सूचित करें।

महत्वपूर्ण रूप से, न्यायालय ने राज्य सरकार को निम्नलिखित कारणों से चार धाम यात्रा शुरू करने के अपने निर्णय की समीक्षा करने का निर्देश दिया:

-सबसे पहले, "डेल्टा प्लस वेरियंट" का उदय, जो पहले से ही मध्य प्रदेश और अन्य दक्षिणी राज्यों को प्रभावित करना शुरू कर चुका है, जल्द ही उत्तराखंड सहित देश के अन्य हिस्सों में फैल जाएगा।

-दूसरा, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के निदेशक द्वारा दिया गया बयान, कि भारत अगस्त, 2021 तक COVID-19 महामारी की तीसरी लहर की चपेट में आ जाएगा।

-तीसरा, COVID-19 महामारी जो अभी भी कहर बरपा रही है, को देखते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने इस साल होने वाली अमरनाथ यात्रा को रद्द करने का फैसला पहले ही कर लिया है।

-चौथा, उपलब्ध आंकड़ों का अवलोकन स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि उत्तराखंड ने एक अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच कुंभ मेले की अनुमति दी थी।

-मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तराखंड में मई, 2021 के महीने में हुईं COVID-19 के कारण 59% मौतें हुई। इस प्रकार, अप्रैल, 2021 में हुए कुंभ मेले और इसके बीच एक स्पष्ट संबध है, जिसके परिणामस्‍वरूप मई, 2021 में उत्तराखंड में मौते हुईं।

-पांचवां, हाल ही में 20.06.2021 को गंगा दशहरा के अवसर पर हरिद्वार में हर की पौड़ी में लाखों लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दी गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, COVID-19 के लिए बरती जाने वाली सावधानियों से संबंधित SOP को अनुपालन की तुलना में उल्लंघन में अधिक देखा गया।

-छठा, कुंभ मेला का आयोजन, और हरिद्वार में हर-की-पौड़ी में गंगा दशहरा पर लाखों लोगों की एक बड़ी भीड़ को अनुमति देना, केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा निर्धारित एहतियाती SOP को प्रशासित करने के लिए नागरिक प्रशासन की विफलता का स्पष्ट प्रमाण है।

-एक बार जब भक्त बड़ी संख्या में इकट्ठा होने लगते हैं, तो अनिवार्य रूप से पहला शिकार स्वयं SOP होता है; दूसरे शिकार बड़े पैमाने पर लोग हैं।

-आठवां, डॉ. आशीष चौहान द्वारा दायर हलफनामे के अनुसार, पर्यटन विभाग को अभी चार धाम यात्रा खोलने के लिए एसओपी तैयार करना है।

अंत में, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी है कि COVID-19 की तीसरी लहर हमारे बच्चों को प्रभावित करेगी।

यदि COVID-19 की वेदी पर बच्चे खो जाते हैं या उनकी बलि दी जा रही है, तो नुकसान न केवल माता-पिता का होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर राष्ट्र का भी होगा।

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