चेक बाउंस मामले में एक्टर राजपाल यादव को आदेश न मानने पर हाईकोर्ट की फटकारा, तिहाड़ जेल में तुरंत सरेंडर करने का निर्देश दिया
Shahadat
5 Feb 2026 8:07 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को बॉलीवुड एक्टर राजपाल नौरंग यादव को चेक बाउंस मामलों (Cheque Bounce Cases) में दोषी ठहराए जाने के संबंध में संबंधित जेल सुपरिटेंडेंट के सामने सरेंडर करने के अपने आदेश को वापस लेने से इनकार किया।
एक्टर को तुरंत तिहाड़ जेल के जेल सुपरिटेंडेंट के सामने सरेंडर करने का निर्देश देते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि कोर्ट से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह किसी भी व्यक्ति के लिए सिर्फ इसलिए कोई खास स्थिति दिखाए या बनाए क्योंकि वह व्यक्ति किसी खास बैकग्राउंड या इंडस्ट्री से जुड़ा है।
जज ने कहा,
"कानून की अदालत सिर्फ कानून के अनुसार समानता के नज़रिए से देखती है। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता के प्रति काफी नरमी दिखाई है, लेकिन वह शिकायतकर्ता की हालत को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती। न्याय के लिए इस कोर्ट को दया और अनुशासन के बीच सावधानी से चलना होगा। नरमी, हालांकि कभी-कभी ज़रूरी होती है, लेकिन इसे लगातार नहीं बढ़ाया जा सकता, खासकर जब आदेश का लगातार पालन न किया जा रहा हो।"
2 फरवरी को कोर्ट ने यादव को चेक बाउंस मामलों में सेटलमेंट की रकम के भुगतान के संबंध में कोर्ट को दिए गए वादों को बार-बार तोड़ने के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए आज तक सरेंडर करने को कहा था।
जस्टिस शर्मा ने कहा था कि यह देखते हुए एक्टर का व्यवहार "निंदनीय है" कि कोर्ट द्वारा कई मौके और काफी नरमी दिखाने के बावजूद, यादव शिकायतकर्ता कंपनी, M/s मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को किए गए भुगतान के वादों को पूरा करने में विफल रहे।
एक्टर अपने वकील के साथ कोर्ट में पेश हुए, जिन्होंने कहा कि यादव कल शाम 4 बजे तिहाड़ जेल के जेल सुपरिटेंडेंट के सामने सरेंडर करने के आदेश का पालन नहीं कर पाए, क्योंकि वह शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान करने के लिए पैसे का इंतज़ाम करने की कोशिश कर रहे थे।
वकील ने कहा कि यादव शाम 5 बजे दिल्ली पहुंचे थे, इसलिए उन्होंने सरेंडर नहीं किया। यह भी कहा गया कि एक्टर के अनुरोध को दया याचिका के रूप में माना जाए और जेल सुपरिटेंडेंट के सामने सरेंडर करने के आदेश को वापस लिया जाए ताकि उन्हें अपने बकाया चुकाने के लिए पैसे का इंतज़ाम करने का मौका मिल सके।
शुरुआत में ही जस्टिस शर्मा ने बॉलीवुड एक्टर के व्यवहार पर कड़ी नाराज़गी जताई, क्योंकि उन्होंने जेल सुपरिटेंडेंट, तिहाड़ के सामने सरेंडर करने के आदेश का पालन नहीं किया। साथ ही कहा कि उन्हें न्यायिक आदेश का पालन करने से किसी भी चीज़ ने नहीं रोका था। कोर्ट ने कहा कि ऐसा बर्ताव कानून के प्रति कम सम्मान दिखाता है। यह भी कहा कि जो लोग कानून का सम्मान नहीं करते, उन्हें खुद भी कानून से कुछ भी अच्छा मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा,
"कानून पालन करने पर इनाम देता है, उसका अपमान करने पर नहीं। जो व्यक्ति कानून के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है, उसे लगातार नरमी दिखाने से समाज में यह संदेश जाएगा कि कानून और कोर्ट के निर्देशों की बार-बार अनदेखी करने पर भी सज़ा नहीं मिलेगी।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"यह कोर्ट अब अपना आदेश वापस लेकर इस तरह का संदेश नहीं जाने दे सकता, जबकि याचिकाकर्ता का बर्ताव इसके लायक नहीं है।"
इस मामले पर 7 फरवरी को सुनवाई होगी।
Title: SH. RAJPAL NAURANG YADAV & ANR v. M/S. MURLI PROJECTS PVT. LTD & ANR

