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रमेश जरकीहोली मामले में देरी का आरोप लगाने वाली शिकायत की जांच के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस आयुक्त ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया

LiveLaw News Network
25 Nov 2021 5:34 AM GMT
रमेश जरकीहोली मामले में देरी का आरोप लगाने वाली शिकायत की जांच के मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस आयुक्त ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया
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बेंगलुरु पुलिस आयुक्त, कमल पंत और दो अन्य पुलिस अधिकारियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की मांग की।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने कब्बन पार्क पुलिस को पूर्व मंत्री रमेश जारकीहोली से जुड़े सेक्स सीडी कांड में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने में कथित रूप से देरी करने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के तहत उनके खिलाफ दायर एक निजी शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया था।

जस्टिस श्रीनिवास हरीश कुमार की सिंगल जज बेंच गुरुवार को याचिका पर सुनवाई कर सकती है।

पंत द्वारा दायर याचिका के अनुसार, पुलिस उपायुक्त एमएन अनुचेथ और पुलिस निरीक्षक मारुति बी ने कहा,

"मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश कानून, तथ्यों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री के विपरीत है। इस तरह मजिस्ट्रेट ने एक त्रुटिपूर्ण आदेश दिया है। इसके परिणामस्वरूप याचिकाकर्ताओं को न्याय का गंभीर नुकसान हुआ।"

मजिस्ट्रेट कोर्ट ने आदर्श आर अय्यर की निजी शिकायत के आधार पर आदेश जारी किया।

अधिवक्ता पी प्रसन्ना कुमार के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया,

"मजिस्ट्रेट ने यंत्रवत् रूप से यह उल्लेख किए बिना आदेश पारित किया कि क्या निजी शिकायत में बताए गए आरोप याचिकाकर्ताओं के खिलाफ संज्ञेय अपराधों की सामग्री को संतुष्ट करेंगे।"

याचिका में जरकीहोली के खिलाफ मामले की जांच करने की मांग करते हुए कब्बन पार्क पुलिस द्वारा दिनेश कल्लाहल्ली नाम के व्यक्ति द्वारा दायर की गई प्रारंभिक शिकायत पर पुलिस द्वारा की गई जांच के बारे में विवरण दिया गया है।

इसके बाद यह कहता,

"यह सही स्थिति होने के कारण दूसरे प्रतिवादी (अय्यर) ने उक्त घटना से संबंधित नहीं होने के कारण 17 मार्च, 2021 को कब्बन पार्क पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के अनुरोध के साथ एक अभ्यावेदन दिया। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि वे कल्लाहल्ली द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने में विफल रहे।"

हालांकि, तब तक तीसरे याचिकाकर्ता ने कल्लाहल्ली द्वारा दिए गए अभ्यावेदन/सूचना को बंद कर दिया, क्योंकि मामले के अस्पष्ट होने के कारण उक्त सूचना में किसी संज्ञेय अपराध के होने का खुलासा नहीं किया गया। शिकायतकर्ता को एक पृष्ठांकन जारी किया गया। इसमें बताया गया कि प्रारंभिक जांच पर विचार किया गया है और कल्लाहल्ली द्वारा किए गए अभ्यावेदन को ललिता कुमारी बनाम यूपी राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय के साथ बंद कर दिया गया।

याचिका में यह भी कहा गया कि पीड़ित लड़की की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है। इसलिए अय्यर द्वारा लगाए गए आरोप कि याचिकाकर्ता सीआरपीसी की धारा 154 (1) के तहत उन्हें दी गई किसी भी जानकारी को दर्ज करने में विफल रहे हैं।

यह भी कहा जाता है कि पुलिस आयुक्त द्वारा जारी एक आदेश द्वारा एक एसआईटी का गठन किया गया और जो जांच की गई है उसकी जांच अब हाईकोर्ट द्वारा की जा रही है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कर्तव्य में कोई लापरवाही नहीं हुई।

अंतरिम राहत के माध्यम से याचिका मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा पारित 23 नवंबर के आदेश के अनुसार संचालन, निष्पादन और आगे की सभी कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग करती है।

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