जमानत राशि का भुगतान आईटीसी के डेबिट लेजर, कैश लेजर से किया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट ने धोखाधड़ी से आईटीसी पाने के आरोपी की जमानत रद्द करने से इनकार

Avanish Pathak

10 May 2022 6:59 AM GMT

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    दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ ने फैसला सुनाया है कि जमानत राशि का भुगतान इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के कैश लेजर और डेबिट लेजर से किया जा सकता है।

    जस्टिस मुक्ता गुप्ता की पीठ के समक्ष विभाग ने यह आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता मेसर्स ब्रिलियंट मेटल्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स प्रोग्रेसिव अलॉयज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स जेबीएन इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों/प्रमुख व्यक्तियों में से एक है।

    वह कथ‌ित रूप से विभिन्न सप्लायरों के बिलों के आधार पर आईटीसी का लाभ उठाने के लिए एक मैकेनिज्‍म तैयार करने का मास्टरमाइंड था। जबकि सप्लायर काल्पनिक थे। इस प्रकार उसने 27.05 करोड़ रुपये के फर्जी आईटीसी का लाभ उठाया। याचिकाकर्ता ने तीनों कंपनियों से आईटीसी में 260 करोड़ रुपये रिसीव किए।

    याचिकाकर्ता को एक स्यूरिटी के साथ एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई।

    2.70 करोड़ रुपये जमा करने की शर्त के संबंध में, याचिकाकर्ता ने 1.10 करोड़ रुपये कैश लेजर के माध्यम से जमा ‌किए और 1.60 करोड़ रुपये डेबिट लेजर के माध्यम से जमा किए और इलेक्ट्रॉनिक आईटीसी लेजर के माध्यम से रिवर्सल किया।

    विभाग के अनुसार, चूंकि आईटीसी धोखाधड़ी के जर‌िए उपलब्ध कराया गया था और इस प्रकार कंपनियों की ओर से दावा किया गया पूरा आईटीसी संदिग्ध था, याचिकाकर्ता जमानत की शर्त के रूप में आईटीसी के र‌िवर्सल के रूप में 1.60 करोड़ रुपये नहीं दे सकता था।

    सीएमएम ने जमानत रद्द करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने इलेक्ट्रॉनिक लेजर से क्रेडिट के रिवर्सल के जर‌िए 1.60 करोड़ रुपये जमा करने की अदालत से कभी पूर्व अनुमति नहीं मांगी और केवल 21 जनवरी, 2020 को न्यायालय के समक्ष चालान के माध्यम से अनुपालन रखा, जब प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता की जमानत रद्द करने के लिए एक आवेदन दायर किया।

    याचिकाकर्ता ने इस आधार पर जमानत रद्द करने को चुनौती दी कि जीएसटी नियमों के नियम 142(2) और 142(3) के तहत जारी जीएसटी-डीआरसी-03, आईटीसी लेजर के कैश या क्रेडिट के माध्यम से राशि जमा करने की अनुमति देता है।

    जीएसटी अधिनियम की धारा 49 अधिनियम के तहत या एकीकृत माल और सेवा कर अधिनियम के तहत आउटपुट टैक्स के लिए कोई भुगतान करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक लेजर में राशि का लाभ उठाने की अनुमति देती है।

    धारा 49 (5) और (6) उस तरीके का वर्णन करती है जिसमें इलेक्ट्रॉनिक लेजर में उपलब्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट की राशि का उपयोग किया जाना है और यह प्रदान करता है कि कर, ब्याज, जुर्माना, शुल्क आदि के भुगतान के बाद इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में शेष राशि जीएसटी अधिनियम की धारा 54 के प्रावधानों के अनुसार वापस किया जा सकता है।

    अदालत ने जमानत आदेश को रद्द करते हुए कहा कि जमानत की शर्तों का पालन न करना इसे रद्द करने का आधार है; हालांकि, वर्तमान मामले में शर्त यह थी कि विभाग के पास 2.70 करोड़ रुपये की राशि जमा की जाए, जो याचिकाकर्ता द्वारा आईटीसी के ट्रांसफर के माध्यम से राशि का एक हिस्सा जमा करके संतुष्ट किया गया था।

    ट्रायल कोर्ट ने माना कि उसके आदेश में केवल विभाग के पास पैसा जमा करना जरूरी है और याचिकाकर्ता को इसे जमा करने के लिए समय दिया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने आंशिक रूप से कैश लेजर द्वारा और आंशिक रूप से आईटीसी के डेबिट लेजर द्वारा राशि जमा करने की शर्त को पूरा किया, यह नहीं कहा जा सकता है कि याचिकाकर्ता उस पर लगाई गई शर्तों को पूरा करने में विफल रहा है।

    केस शीर्षक: अमित गुप्ता बनाम जीएसटी इंटेलिजेंस मुख्यालय महानिदेशालय

    सिटेशन: 2022 लाइव लॉ (दिल्ली) 426

    आदेश पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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