'लोग कैसे मान लेते हैं कि उन्हें मोबाइल पर अरेस्ट किया जा सकता है?' 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम पर CJI ने जताई हैरानी

  • लोग कैसे मान लेते हैं कि उन्हें मोबाइल पर अरेस्ट किया जा सकता है? डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर CJI ने जताई हैरानी

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के लगातार सामने आने पर गहरी निराशा जताई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने सवाल उठाया कि पढ़े-लिखे नागरिक भी आखिर कैसे ऐसे धोखों का शिकार हो जाते हैं।

    'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम के मामले में स्वतः संज्ञान (suo motu) लेते हुए चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI), जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 'एमिक्स क्यूरी' (अदालत की मदद करने वाली वकील) और सीनियर एडवोकेट एनएस नप्पिनाई की दलीलें सुनीं। उन्होंने अदालत को बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद ये स्कैम जारी हैं। उन्होंने हाल ही की एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक महिला ने 2.5 करोड़ रुपये गंवा दिए।

    उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा 30 मार्च को दी गई आखिरी स्टेटस रिपोर्ट के बाद भी, 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

    चीफ जस्टिस ने हैरानी जताई कि जन-जागरूकता अभियानों, समाचार रिपोर्टों और अदालती आदेशों के बावजूद लोग इसका शिकार हो रहे हैं।

    CJI ने कहा,

    "हमें इस बात पर हैरानी है कि लोग समझ क्यों नहीं रहे हैं? पीड़ितों के साथ क्या दिक्कत है? क्या वे सामान्य इंसान नहीं हैं? मीडिया में हर जगह इसके बारे में बताया जा रहा है।"

    उन्होंने आगे कहा,

    "एक लोकतांत्रिक देश में आप किस तरह के इंसान हैं, जो यह मान लेते हैं कि आपको मोबाइल पर गिरफ्तार किया जा रहा है? मोबाइल को दीवार पर दे मारें, गिरफ्तारी खत्म हो जाएगी!"

    'एमिक्स क्यूरी' ने बताया कि पीड़ितों के मन में गिरफ्तारी का डर होता है। कुछ मनोवैज्ञानिकों का मानना ​​है कि यह एक तरह का 'हिप्नोसिस' (सम्मोहन) है, जिसके कारण जागरूकता अभियानों के बावजूद लोग इसका शिकार बनते जा रहे हैं।

    CJI ने निराशा जताते हुए कहा कि पढ़े-लिखे लोग भी ठगे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे पीड़ित अपनी अगली पीढ़ी को क्या संस्कार या सीख देंगे?

    उन्होंने बताया कि लोग अदालती वेबसाइटों पर जाकर आसानी से यह जांच सकते हैं कि कोई अदालती आदेश असली है या नहीं।

    आगे कहा गया,

    "हम बहुत निराश हैं - पढ़े-लिखे लोग भी ठगे जा रहे हैं। अगर आप इस उम्र में 'डिजिटल अरेस्ट' का शिकार हो जाते हैं, तो आप अगली पीढ़ी को क्या सिखाएंगे? [फर्जी आदेशों के दुरुपयोग पर] लोग अदालतों की वेबसाइट पर जाकर चेक कर सकते हैं कि क्या वाकई कोई आदेश जारी हुआ है।"

    Case Title : In Re: Victims of Digital Arrest Related to Forged Documents

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