ज़मानत कब दी जाए? इस पर सुप्रीम कोर्ट को ट्रायल जज की 'सलाह' की ज़रूरत नहीं
Shahadat
3 Oct 2026 10:00 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के ट्रायल कोर्ट जज की टिप्पणियों पर नाराज़गी जताई। जज ने आपराधिक मामले की सुनवाई पूरी करने के लिए और समय मांगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह भी देने की कोशिश की कि ज़मानत कब दी जानी चाहिए और कब नहीं।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने उस तरीके पर नाराज़गी जताई, जिससे बारासात (उत्तर 24 परगना) में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज (तीसरी कोर्ट) ने सुनवाई पूरी करने के लिए और समय मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था।
बेंच ने कहा कि ट्रायल जज के पत्र लिखने के तरीके से वे "काफी परेशान" थे।
बेंच ने कहा,
"यह पीठासीन अधिकारी का काम नहीं है कि वह सलाह दे कि इस कोर्ट को कब ज़मानत देनी चाहिए और कब नहीं। पत्र के आखिरी दो पैराग्राफ हमें पसंद नहीं आए।"
कोर्ट ने देखा कि ट्रायल जज ने 11 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट के असिस्टेंट रजिस्ट्रार को पत्र लिखकर सुनवाई पूरी करने के लिए और समय मांगा था।
बेंच ने याद दिलाया कि 11 मई, 2026 के आदेश से उसने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।
बेंच ने टिप्पणी की,
"ट्रायल जज ने जिस तरह से इस कोर्ट को पत्र लिखकर और समय मांगा, उससे हम काफी परेशान हैं।"
पत्र के आखिरी दो पैराग्राफ पर आपत्ति जताते हुए कोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि संबंधित पीठासीन अधिकारी से जल्द-से-जल्द उचित स्पष्टीकरण मांगा जाए।
यह मामला कलकत्ता हाईकोर्ट के 5 मार्च, 2026 के आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने अमित घोष को ज़मानत देने से इनकार किया, लेकिन अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज करने के लिए और समय बीतने के बाद उन्हें अपनी ज़मानत याचिका फिर से दाखिल करने की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट ने देखा कि 30 जनवरी, 2026 के अपने पिछले आदेश के बाद छह गवाहों से पूछताछ की गई। बिधाननगर डिवीज़न के एडिशनल डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर, हाई कोर्ट को बताया गया कि अभियोजन पक्ष 25 और गवाहों से पूछताछ करना चाहता है। कोर्ट ने राज्य को निर्देश दिया कि वह 1 मई, 2026 तक कम से कम 12 और गवाहों से पूछताछ पूरी करे।
उस समय ज़मानत देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए घोष को तय समय के बाद अपनी ज़मानत अर्ज़ी पर दोबारा विचार करने की छूट दी।
जब घोष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे तो जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने देखा कि हालांकि हाईकोर्ट ने उम्मीद की थी कि बाकी 12 गवाहों से पूछताछ 1 मई, 2026 तक पूरी हो जाएगी, लेकिन 11 मई, 2026 तक एक भी गवाह से पूछताछ नहीं हुई।
सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए राज्य को "एक आखिरी मौका" देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह यह पक्का करे कि ट्रायल तीन महीने के अंदर "बिना किसी चूक के" पूरा हो जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रायल के निपटारे की जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी जाए।
Case Title : Amit Ghosh v. State of West Bengal
अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

