एनजेडीजी में जल्द शामिल होगा सुप्रीम कोर्ट, एक्सेसिबिलिटी फीचर्स के साथ फ्री टेक्स्ट सर्च पोर्टल पर उपलब्ध होंगे फैसले : जस्टिस चंद्रचूड़

Avanish Pathak

24 Sept 2022 5:35 PM IST

  • जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़

    जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़

    सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट निकट भविष्य में नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) से जुड़ जाएगा और इसके परिणामस्वरूप सुप्रीम कोर्ट के सभी फैसले एक फ्री टेक्स्ट सर्च पोर्टल में उपलब्ध होंगे।

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि विकलांग व्यक्तियों की आसान पहुंच के लिए उन निर्णयों सुलभता विशेषताएं इन बिल्ड होंगी। जस्टिस चंद्रचूड़ ने लाइव लॉ द्वारा आयोजित तीसरे प्रोफेसर शामनाद बशीर मेमोरियल लेक्चर में बोलते हुए ये जानकारी दी।

    वर्तमान में, NJDG में हाईकोर्टों, जिला न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों के निर्णय शामिल हैं।

    "विकलांगता के अधिकारों को वास्तविक बनाना: पहुंच और अन्य मुद्दों को संबोधित करना" विषय पर व्याख्यान देते हुए, जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति विकलांग व्यक्तियों के लिए न्यायिक प्रणाली के डिजिटल बुनियादी ढांचे को और अधिक सुलभ बनाने के प्रयास कर रही है।

    "हमने सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाईकोर्ट की वेबसाइटों पर ऑडियो-कैप्चा पेश किया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि दृष्टिबाधित प्रोफेशनल्‍स को वाद-सूची या मामले की स्थिति को देखने में कोई बाधा न हो।

    हमने यह भी सुनिश्चित किया है कि केस फाइलें पठनीय और स्क्रीन-रीडर फ्रेंडली हो।

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा,

    राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से ई-समिति ने विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ एक जजमेंट सर्च पोर्टल भी बनाया है। हाईकोर्टों के पचहत्तर लाख से अधिक निर्णय एक्सेसे के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होंगे। नेत्रहीनों को अपनी जरूरतों को समायोजित करने के लिए निजी सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की अनिच्छा का सामना नहीं करना पड़ेगा।"

    उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट भी निकट भविष्य में राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड में शामिल होने के लिए तैयार है, सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्णय एक मुफ्त टेक्स्ट सर्च पोर्टल में उपलब्ध होंगे, जिसमें एक्सेसिबिलिटी अंतर्निहित है।"

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि ई-समिति की पहल से ओडिशा और केरल के हाईकोर्टों ने पेपरलेस अदालत प्रणाली को अपनाया है। फाइलों और अदालती रिकॉर्डों का डिजिटलीकरण यह सुनिश्चित करेगा कि अदालतें विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ रहें।

    आशा है कि दृष्टिबाधित व्यक्ति जज बनेंगे

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि विकलांग व्यक्तियों के प्रवेश में आने वाली बाधाओं को दूर कर भारतीय न्यायिक सेवाओं को और अधिक समावेशी बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने विकास कुमार बनाम यूपीएससी मामले में फैसले का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि न्यायिक सेवाओं के लिए योग्यता से 50% से अधिक दृष्टिबाधित व्यक्तियों का बहिष्कार विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 2016 में निहित सिद्धांत के अनुरूप नहीं था।

    कानूनी डेटा बेस विकलांग व्यक्तियों के लिए सुलभ नहीं हैं

    अदालत में होने वाली कानूनी बहस अक्सर वास्तविक कानूनी अनुसंधान द्वारा समर्थित होते हैं, जो किसी भी कानूनी पेशेवर का एक अभिन्न अंग होता है। कानूनी डेटाबेस शिक्षाविदों और पेशेवरों दोनों के लिए समान रूप से कानूनी पेशे का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। हालांकि, अधिकांश कानूनी डेटाबेस विकलांग व्यक्तियों के लिए दुर्गम हैं। बिना लेबल वाले लिंक, स्क्रीन रीडर के बिना वेब पेज और पीडीएफ फाइलों तक पहुंच न हो पाना और वेबसाइटों और ब्लॉगों पर इमेजेज़ के लिए वैकल्पिक टेक्‍स्ट का न होना विकलांग व्यक्तियों की क्षमता पर चिलिंग इफेक्ट डालता है।

    लॉ स्कूलों को विकलांग व्यक्तियों को उचित एकॉमोडेशन देना चाहिए

    लॉ स्कूल विकालांगों के लिए सुगम वातावरण बनाने का बीड़ा उठा सकते हैं। यदि हम वास्तव में मानते हैं कि लॉ स्कूलों के उत्पादों की कानून और नीति बनाने में एक भूमिका है, तो हमें विकलांग व्यक्तियों को उचित एकॉमोडेशन प्रदान करने के लिए हमारे लॉ स्कूलों और संस्थानों की विफलता को दूर करने की आवश्यकता है। यह खुद को मुखर करने और कानूनी क्षेत्र में प्रभावी रूप से योगदान करने की उनकी क्षमता को प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप एक कानूनी बिरादरी का निर्माण होता है जो काफी हद तक समावेशी है। कानूनी बिरादरी के भीतर विकलांग व्यक्तियों की पहचान की अदृश्यता हमारे संविधान में निहित समानता और गैर-भेदभाव की संवैधानिक गारंटी का अपमान है।

    जस्टिस चंद्रचूड़ का पूरा भाषण देखेंं-

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