ग्वालियर में हज़रत शेख मुहम्मद गौस की मज़ार पर उर्स और नमाज़ की इजाज़त की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ASI से जवाब

Shahadat

10 March 2026 10:29 AM IST

  • ग्वालियर में हज़रत शेख मुहम्मद गौस की मज़ार पर उर्स और नमाज़ की इजाज़त की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा ASI से जवाब

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। इस आदेश में हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उस फैसले को सही ठहराया था, जिसमें ग्वालियर में हज़रत शेख मुहम्मद गौस की मज़ार पर (जो केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक है) उर्स और नमाज़ की इजाज़त देने से मना कर दिया गया था।

    जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने ASI और भारत सरकार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) के जवाब में एक जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए समय दिया।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील मनन मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि उर्स आयोजित करने की तारीख तो बीत चुकी है, लेकिन उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस मामले पर फैसला सुनाया जाए, क्योंकि भविष्य में यह प्रासंगिक होगा।

    उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में उसी परिसर के अंदर एक संगीत समारोह आयोजित करने की इजाज़त दी गई। मिश्रा ने दलील दी कि उर्स और नमाज़ की इजाज़त देने से इनकार करना मनमाना था और कहा कि आयोजक यह लिखित आश्वासन (undertaking) दे सकते हैं कि वे स्मारक को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

    भारत सरकार और ASI की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि यह मुद्दा 2024 से जुड़ा था और अब यह केवल एक अकादमिक विषय बनकर रह गया, क्योंकि संबंधित तारीख बीत चुकी है।

    उन्होंने अन्य कार्यक्रमों के साथ तुलना किए जाने का भी विरोध किया। साथ ही कहा कि कहीं और आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों को याचिकाकर्ता के दावे के बराबर नहीं माना जा सकता।

    उन्होंने कहा,

    "हम किसी विशेष संरक्षित स्मारक में कोई धार्मिक अधिकार स्थापित नहीं करना चाहते।"

    कोर्ट ने संकेत दिया कि वह इस मामले का निपटारा इस शर्त के साथ करेगा कि याचिकाकर्ता इजाज़त के लिए एक नया आवेदन दायर कर सकता है, जिस पर ASI कानून के अनुसार विचार करेगा।

    जस्टिस नागरत्ना ने कहा,

    "वे अगले साल के लिए एक नया आवेदन दायर कर सकते हैं; उस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।"

    मिश्रा ने अनुरोध किया कि इस तरह का विचार-विमर्श हाईकोर्ट के फैसले से प्रभावित हुए बिना किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक कोई जवाबी हलफनामा दायर नहीं किया गया और कोर्ट से अनुरोध किया कि वह प्रतिवादियों को निर्देश दे कि कोर्ट द्वारा मामले का निपटारा करने से पहले वे कम से कम एक जवाबी हलफनामा दायर करें।

    मिश्रा के अनुरोध को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित की; ऐसा तब किया गया जब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने भारत सरकार और ASI की ओर से जवाबी हलफनामा दायर करने के लिए समय मांगा।

    Case Title – Sabla Hasan v. Union of India

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