सबरीमाला सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने अप्रासंगिक दलीलों पर वकील को फटकारा

Praveen Mishra

28 April 2026 3:31 PM IST

  • सबरीमाला सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने अप्रासंगिक दलीलों पर वकील को फटकारा

    सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय को अप्रासंगिक और विषय से बाहर की दलीलें देने पर कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने उन्हें कई बार निर्देश दिया कि वे अपने तर्क केवल विचाराधीन मुद्दों तक सीमित रखें।

    सुनवाई के दौरान उपाध्याय ने “धर्म” को “रिलिजन” से बड़ा बताते हुए कहा कि धार्मिक मतभेदों के कारण भारत का विभाजन हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को अपने फैसले के दूरगामी प्रभावों पर विचार करना होगा और यह तय करेगा कि भारत भविष्य में किस दिशा में जाएगा।

    उन्होंने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 अत्यंत सीमित हैं और धर्म प्रचार का अधिकार कई पश्चिमी संविधानों में भी मान्य नहीं है। साथ ही उन्होंने संस्कृत और अंग्रेजी भाषा की तुलना करते हुए कहा कि अंग्रेजी में “संविधान” और “धर्म” जैसे शब्दों का सटीक अनुवाद संभव नहीं है।

    इस पर जस्टिस महादेवन ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वकील विषय से भटक रहे हैं और उन्हें केवल मुद्दे पर ही अपनी दलीलें रखनी चाहिए। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने भी उन्हें भाषा संबंधी बहस से बचने को कहा।

    जब उपाध्याय ने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए अपनी दलीलें जारी रखीं, तो जस्टिस अमानुल्लाह ने उन्हें रोकते हुए कहा, “हमें आपको रोकना पड़ेगा।” इसके बाद चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “समय समाप्त हो गया है।”

    अपने निष्कर्ष में उपाध्याय ने कहा कि सबरीमाला मंदिर की विशिष्ट पवित्रता है और 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध उचित है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि सभी धर्म समान हैं और अदालत इस प्रकार की बहस में नहीं जाएगी।

    जस्टिस एम. एम. सुंदरश ने भी वकील को फटकारते हुए कहा, “इस तरह की दलीलें न दें।” वहीं न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा कि उन्हें मामले के दायरे को समझना चाहिए। अंत में पीठ ने कहा, “हमने आपको सुन लिया है,” और वकील को अपनी दलील समाप्त करने का संकेत दिया।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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