गंगा के किनारों पर अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

Praveen Mishra

14 March 2026 4:10 PM IST

  • गंगा के किनारों पर अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी राज्यों से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने गंगा नदी के किनारों और बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर पूरे देश से व्यापक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट पटना (बिहार) में गंगा के फ्लडप्लेन पर अवैध निर्माण से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था।

    जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने केंद्र सरकार, बिहार सरकार और उन सभी राज्यों को निर्देश दिया जिनसे होकर गंगा नदी गुजरती है कि वे नदी के किनारों पर अतिक्रमण की मौजूदा स्थिति और उन्हें हटाने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण कोर्ट के सामने रखें।

    कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, झारखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों को नोटिस जारी किया, क्योंकि जानकारी दी गई कि इन राज्यों में भी गंगा के किनारों पर अतिक्रमण की शिकायतें सामने आई हैं।

    यह मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2020 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें पटना में गंगा किनारे अतिक्रमण के आरोपों वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि याचिका में कथित उल्लंघनों और उल्लंघन करने वालों का पर्याप्त विवरण नहीं दिया गया है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बताया कि पटना में दीघा घाट से नौज़र घाट के बीच किए गए सर्वे में 213 अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इनमें से 58 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं, जबकि 145 अब भी बने हुए हैं। राज्य सरकार ने कहा कि इन्हें हटाने की कार्रवाई हाईकोर्ट और जिला अदालतों के अंतरिम आदेशों के कारण रुकी हुई है।

    याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि नौज़र घाट से नूरपुर घाट के बीच भी सैकड़ों अतिक्रमण मौजूद हैं, जिससे स्पष्ट है कि समस्या कहीं अधिक व्यापक है।

    कोर्ट ने यह भी नोट किया कि नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) ने पहले एक हलफनामा दायर कर कई राज्यों में अतिक्रमण की स्थिति बताई थी, लेकिन वह 2024 का हलफनामा है, इसलिए वर्तमान स्थिति जानने के लिए ताजा और विस्तृत रिपोर्ट जरूरी है।

    कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यों से पूछा कि:

    गंगा के किनारों और फ्लडप्लेन पर अतिक्रमण की वर्तमान स्थिति क्या है?

    7 अक्टूबर 2016 की अधिसूचना को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

    इसके प्रभावी क्रियान्वयन में क्या बाधाएं आ रही हैं?

    भविष्य में अतिक्रमण हटाने के लिए क्या उपाय प्रस्तावित हैं?

    गंगा के फ्लडप्लेन की डिमार्केशन (सीमा निर्धारण) की स्थिति क्या है?

    इस ढांचे को प्रभावी बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से किस प्रकार के निर्देश सहायक होंगे?

    गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2016 की अधिसूचना पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत जारी की गई थी, जिसका उद्देश्य गंगा नदी के संरक्षण, पुनर्जीवन और प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तय करना है। इसमें नदी के पर्यावरणीय प्रवाह को बनाए रखना, प्रदूषण को रोकना और नदी के किनारों तथा फ्लडप्लेन की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है।

    कोर्ट ने कहा कि लगातार हो रहे अतिक्रमण को देखते हुए इन प्रावधानों की प्रभावशीलता की समीक्षा जरूरी है।

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार को अगली सुनवाई से पहले अपडेटेड रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल 2026 को होगी।

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